उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की एक पॉश कालोनी में बुधवार को दिल दहला देने वाली घटना से सबके रोंगटे खड़े हो गए।
घर के बगल में अवैध निर्माण पर कार्रवाई न होने से क्षुब्ध 60 वर्षीय महिला ने मिट्टी का तेल छिड़ककर खुद को आग लगा दी।
करीब 90 फीसदी झुलसी महिला को देहरादून के एक नर्सिंगहोम के लिए रेफर कर दिया गया, जहां गुरुवार को लगभग 12:30 बजे महिला की मौत हो गई।
सुसाइड नोट में महिला ने घटना के लिए पड़ोसियों को ठहराया जिम्मेदार है।
परमजीत सिंह अपनी पत्नी परमजीत कौर (60) के साथ बिल्वकेश्वर कालोनी में रहते हैं। इकलौती बेटी की शादी हो चुकी है। परमजीत के बगल के घर में निर्माण कार्य चल रहा है।
सबके सामने लगा ली आग
बुजुर्ग दंपति निर्माण को अवैध बताते हुए दो माह से हरिद्वार विकास प्राधिकरण, सिटी मजिस्ट्रेट एवं शहर कोतवाली से इसकी शिकायत कर रहा है लेकिन प्रशासन ने शिकायत पर कार्रवाई दूर संज्ञान तक नहीं लिया।
बुधवार को भी निर्माण कार्य जारी रहने पर परमजीत ने ऐतराज जताया। पड़ोसी महिला को समझा ही रहे थे तभी महिला अपने घर चली गई। चंद मिनट बाद महिला खुद पर मिट्टी का तेल छिड़कर बाहर निकली और आग लगा दी।
महिला के आग लगाते ही वहां चीख पुकार मच गई। जैसे-तैसे आग बुझाकर आनन-फानन में महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
महिला की हिम्मत देख सब दंग
करीब 90 प्रतिशत तक झुलसी महिला की हिम्मत देखकर सब दंग रह गए। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आग बुझाने के बाद महिला खुद चलकर कार में बैठी थी। केवल इतना बोल पा रही थी कि पैर में दर्द हो रहा है। बाकी मैं ठीक हूं।
रिश्तेदार का है कहना
ससुरालियों के बगल में चल रहे अवैध निर्माण की शिकायत सास-ससुर एचडीए, सिटी मजिस्ट्रेट एवं पुलिस से कर चुके थे। लेकिन दो माह से सुनवाई नहीं हो रही थी। इससे क्षुब्ध होकर सासू जी ने खुद को आग लगाई।
-गुरप्रीत सिंह उर्फ मिक्की, महिला का दामाद
आठ लाइन का लिखा है सुसाइड नोट
खुद को आग के हवाले करने से पहले परमजीत कौर ने आठ लाइन का सुसाइड नोट लिखा है। उसका मजमून कुछ ये है:-
कोर्ट में केस है। अवैध निर्माण का फिर भी कार्य रुक नहीं रहा। मैं परमजीत कौर अपने पड़ोसी गुरजीत सिंह और उसकी पत्नी सिम्मी की धमकियों और दादागिरी से तंग आकर उनके घर के सामने आत्मदाह कर रही हूं।
उन लोगों (गुरजीत/सिम्मी) का कहना है कि वो पिल्लर, दीवार हमारी तरफ से उसके बाद सीढ़ियां सब कुछ बनवाएंगे। हम पति-पत्नी बुढ़ापे में मजबूर हैं। कानूनी कार्रवाई ही कर सकते हैं।