देहरादून। उत्तराखंड की मलिन बस्तियों के निवासियों के हक के लिए विभिन्न जनसंगठन और राजनीतिक दल संयुक्त रूप से आंदोलन करेंगे। इस संबंध में ‘जन हस्तक्षेप’ के बैनर तले विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी प्रेषित किया है।
प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के मलिन बस्तियों के लाखों परिवार भय की स्थिति में रह रहे हैं। हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद सरकार 2018 में देहरादून के लाखों घर उजाड़ने को तैयार हो गई थी। जनआक्रोश होने के बाद सरकार ने एक अध्यादेश लाकर इस पर तीन साल के लिए रोक लगा दी थी। यह तीन साल जून में खत्म होने वाले हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने उनके पुर्नवास के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं। इसलिए विभिन्न जनसंगठनों और राजनीतिक दलों को एक मंच पर आकर आंदोलन का एलान करना पड़ रहा है। अतिक्रमण के नाम पर किसी भी परिवार को बेघर नहीं किया जाना चाहिए। अगर किसी क्षेत्र में पर्यावरण, आपदा के खतरे या विकास कार्यों की वजह से लोगों को हटाने की जरूरत है तो पहले पारदर्शी तरीके से उन्हें पुर्नवासित किया जाए। इन इलाकों के अलावा अन्य क्षेत्र में यदि कोई एक साल से अधिक समय से खुद के घर में रह रहा है तो उन्हें सूक्ष्म शुल्क देने पर घर का पट्टा मिलना चाहिए। बस्तियों में हॉस्टल बनाने चाहिए और उन्हें कम दाम पर आवास उपलब्ध कराए जाने चाहिए। योजना का निर्माण भी वहां रह रहे मजदूरों से कराना चाहिए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि सरकार को सबसे पहले आवास नीति बनानी चाहिए। प्रेसवार्ता में जनहस्तक्षेप के शंकर गोपाल, सीपीआई के राज्य सचिव समर भंडारी, सपा के एसएन सचान, महिला मंच की निर्मला बिष्ट, राकेश पंत, उक्रांद के शिवप्रसाद सेमवाल सहित अन्य संगठनों और मलिन बस्तियों के लोग मौजूद रहे।