मैदानों में जहां लोग कोहरे से परेशान हैं, वहीं पहाड़ी इलाकों में मौसम खुशगवार बना हुआ है। रात के समय खुले आसमान में टिमटिमाते तारे और दिन के समय हिमाच्छादित चोटियों का नजारा देखने लायक है।
पर्यटकों के लिए मौसम अच्छा
कुछ दिनों में बर्फबारी हो जाए तो हिमक्रीड़ा का आनंद ही कुछ और है। शीतकालीन पर्यटन के लिए इन आदर्श स्थितियों के बावजूद जिले के पर्यटन स्थल सूने पड़े हैं।
ढांचागत सुविधाओं का विकास और प्रचार किया जाए तो आपदा की भेंट चढ़े यात्रा सीजन की कुछ भरपाई तो हो ही सकती है।
सरकार नहीं कर रही प्रयास
होटल एसोसिएशन अध्यक्ष अजय पुरी का कहना है कि शीतकालीन पर्यटन की संभावनाओं के बावजूद सरकार ने कभी इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं किया।
प्रयास हों तो न सिर्फ आपदा की भेंट चढ़े यात्रा सीजन की भरपाई हो सकती है, बल्कि पर्यटन के सहारे सीमांत क्षेत्रों में भी रोजगार का दरिया बहा कर पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
पर्यटन अधिकारी का है कहना
जिला पर्यटन अधिकारी खुशाल सिंह नेगी ने बताया कि जिले में शीतकालीन पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। बीते सालों में सर्दियों में यहां देशी-विदेशी पर्यटक स्टार वाचिंग, बर्ड वाचिंग, जंगल सफारी और हिमक्रीड़ा के लिए आते भी रहे हैं।
कुछ सालों से बरसात के दौरान सड़कें बदहाल होने के कारण अब पर्यटक सर्दियों में भी यहां आने से परहेज कर रहे हैं। सड़कें सुधरें तो इस दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल
जिले में सर्दियों में चौरंगीखाल, नचिकेता ताल, डोडीताल, दयारा बुग्याल, कुश कल्याण, गंगनानी, हर्षिल, बार्सू, रैथल, मुखबा, खरसाली, सांकरी, हरकीदून, जरमोला, राड़ी टॉप, गंगनाणी आदि पर्यटक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।