अतिवृष्टि से कपीरी पट्टी के ग्वाड़, फलोटा, सुपतोली, बिडोली, धारडुंग्री, खोला, द्यूडी, घाघूमोंणा, सुमल्टा, कोलाडुंग्री, नाकोट आदि गांवों में पेयजल लाइन बह गई। साथ ही लंगासू में वशिष्ठेश्वर शिव मंदिर के आगे का पुश्ता टूटने से मंदिर को खतरा हो गया है।
पूर्व प्रधान रणबीर कंडवाल, कपीरी संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेंद्र नेगी आदि ने बताया कि क्षेत्र का मंगरा गदेरा उफान पर आने से पेयजल चेंबर और लाइन बह गई जिससे गांवों में पानी की समस्या हो गई है।
वहीं लंगासू में बने शिव मंदिर का पुश्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया है। बारिश के कारण लोग घरों के बाहर रहे। नायब तहसीलदार गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि लंगासू और टटेश्वर महादेव मंदिर में क्षतिग्रस्त पुश्तों का निरीक्षण कर दिया गया है।
देवाल की कई सड़कें बंद
बारिश के कारण देवाल-थराली सड़क नंदकेशरी व पूर्णा के बीच चट्टान गिरने से बंद हो गई। इस बीच हल्द्वानी, देहरादून व थराली जाने वाले कई वाहन फंसे रहे। लोनिवि ने जेसीबी से मलबा हटाकर यातायात बहाल कराया। वहीं हाटकल्याड़ी-जैनबिष्ट के पास भी मलबा आने से सवाड़ व घेस सड़क दिनभर बंद रही। घेस गांव के धन सिंह व कुंदन भंडारी ने सड़क पर नियमित जेसीबी रखने की मांग की। वहीं पीएमजीएसवाई के ईई प्रमोद गगाड़ी ने कहा कि जो सड़कें बंद है उन्हें खोलने के लिए जेसीबी भेज दी गई हैं।
प्रदेश में रविवार को दो राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 158 सड़कें अभी भी बंद हैं। इन सड़कों में मलबा आ जाने से यातायात पूरी तरह से बाधित हैं। इनमें प्रमुख मार्गों को तत्काल खोलने के लिए लोनिवि की मशीनरी युद्ध स्तर पर जुटी है।
शुक्रवार तक प्रदेश में 235 सड़कें मलबा और चट्टानें आ जाने की वजह से बंद हो गई थीं। विभागीय मशीनीरी ने इन मार्गों को खोला लेकिन भारी बारिश के कारण ये मार्ग भी बाधित हो गए। मानसून के दौरान अब तक 1465 मार्ग बाधित हो चुके हैं, जिनमें से 1307 मार्गों को खोला जा चुका हैं। इनमें अधिकांश मार्ग बार बार बाधित हो रहे हैं।
रविवार तक प्रदेश में बदरीनाथ और यमुनोत्री एनएच को छोड़कर बाकी सभी राष्ट्रीय राजमार्ग खुले हैं। इनके अलावा नौ स्टेट हाईवे भी बाधित हैं, जिन्हें खोलने के लिए 20 मशीनें तैनात की गई हैं।
आधा दर्जन जिला मोटर मार्गों पर भी यातायात ठप है। 59 ग्रामीण मार्ग भी जगह जगह से टूट गए हैं या उनमें मलबा आ गया है। लोनिवि के विभागाध्यक्ष हरिओम शर्मा के मुताबिक, बंद पड़ी 158 सड़कों को खोलने के लिए 294 मशीनें लगाई गई हैं। मौसम ने साथ दिया तो अधिकांश मार्गों को सोमवार तक खोल दिया जाएगा।