पेयजल निगम की कार्यप्रणाली से उपभोक्ता परेशान है। निगम खुद तो पानी के बिल समय से नहीं बांट रहा है, और उपभोक्ताओं से बिलंब शुल्क वसूल रहा है। आलम यह है कि जब निगम की ओर से कोई बिल नहीं आ रहा है तो खुद उपभोक्ताओं को अपने बिलों के लिए बिलिंग सेंटर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई उपभोक्ता तो ऐसे हैं, जिन्हें जब से पेयजल व्यवस्था पेयजल निगम के हाथ में आई है, तब से एक भी बिल नहीं मिला है।
दरअसल, सहसपुर और धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के कई क्षेत्रों में मेंहूवाला पेयजल कलस्टर योजना के तहत पेयजल व्यवस्था जल निगम के हाथ में है। इससे पहले यहां व्यवस्था जल संस्थान देखता था। पेयजल व्यवस्था हाथ में आए दो साल होने को हैं, लेकिन अभी तक न तो पेयजल निगम योजना को पूरा कर पाया है और न ही अन्य व्यवस्थाएं। यहां तक कि निगम अभी तक पानी के बिलों की व्यवस्था तक ठीक नहीं कर पाया है। उपभोक्ताओं को समय से पानी के बिल नहीं पा रहे हैं। कई क्षेत्रों में तो जब से पेयजल निगम के पास व्यवस्था आई है, आज तक एक भी बिल नहीं पहुंचा है। जिससे उपभोक्ताओं को खुद अपने बिल ढूंढने निगम की ओर से बनाए गए बिलिंग सेंटर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बिलिंग सेंटर में भी कर्मचारियों की कमी और अन्य सुविधाएं न होने के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, निगम की ओर से बिलिंग की व्यवस्था एक प्राइवेट कंपनी को सौंपी है। पेयजल निगम की ओर से कई बार निर्देर्शों के बाद भी कंपनी अनसुना कर रही है। जिसका सीधा खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।
बिलों से संबंधित शिकायतें उन्हें लगातार मिल रही है। इस संबंध में कंपनी के अधिकारियों को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं। उन्हें दस दिन के अंदर व्यवस्थाएं सुधारने के लिए कहा गया है। अगर इसके बाद भी व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो कंपनी पर पैनल्टी के साथ ही अन्य कार्रवाई की जाएगी।
सीता राम, महाप्रबंधक पेयजल निगम