वायरल संक्रमण ने स्मोकर्स की सांस फुला दी है। जो लोग धुम्रपान के आदी हैं उनके फेफड़ों पर वायरल संक्रमण का अधिक असर हो रहा है। बुधवार को एक रोगी बुरी तरह हांफता हुआ दून अस्पताल परिसर तक तो पहुंच गया लेकिन इमरजेंसी गेट पर उसकी मौत हो गई। सांस फूलने की शिकायत लेकर आ रहे अन्य रोगियों को गंभीर हालत में अस्पताल में भरती किया गया।
सांस उखड़ने से मौत
जो लोग धुम्रपान के लती हैं, उन्हें इस मौसम में वायरल संक्रमण भारी पड़ रहा है। विकासनगर के रहने वाले राजेंद्र गुप्ता की दून इमरजेंसी के गेट पर मौत हो गई। उन्हें परिजन आटो से लेकर आए थे। उनकी सांस उखड़ गई थी। उनके पुत्र वैभव ने बताया कि रोगी का इलाज क्षेत्रीय डाक्टर के यहां चल रहा था। बुधवार को सरकारी और निजी डाक्टरों के यहां ओपीडी में ऐसे रोगियों की भरमार रही।
आईएमए के प्रांतीय सचिव सीनियर फिजिशियन डा. डीडी चौधरी ने बताया कि बीड़ी, सिगरेट पीने वालों को वायरल संक्रमण से अधिक दिक्कत हो रही है। उनके फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। डा. चौधरी ने बताया कि वायरल संक्रमण के अलावा टायफाइड, पीलिया और मलेरिया के रोगी आ रहे हैं। दून अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा आरएस असवाल ने बताया कि अगर कोई दस साल धुम्रपान कर लेता है तो फेफड़े एक चौथाई ही काम करते हैं। वायरल संक्रमण का असर सांस तंत्र पर आता है। स्मोकर्स को आम रोगियों से अधिक सांस की दिक्कत हो जाती है।
आपदा राहत कोष में धन दिया
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दो लाख 28 हजार धनराशि दी। स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से एसोसिएशन के पदाधिकारी विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में मिले थे। इस मौके पर सीएस मेहरा, सुनील नौटियाल, एनपी भट्ट, बीएस पयाल, डीपी थपलियाल, सुधा कुकरेती, सूर्यमणि डंगवाल, भजन सिंह कलूडा आदि रहे।
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