चर्चा यह है कि वह फिर से मेयर का चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे में विरोधी दलों की धड़कने तेज हो गई हैं। इसकी कई वजह भी हैं। पहली यह कि संभावित दावेदारों में चमोली पार्टी के सबसे मजबूत प्रत्याशी हैं।
क्योंकि चमोली पिछली दो बार से लगातार मेयर हैं। वहीं, दूसरी वजह यह कि 57 विधायकों के प्रचंड बहुमत वाली सरकार से अगर एक विधायक कम हो भी जाता है, तो सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
जानकारों का यह भी कहना है कि बीते दिनों सूबे की सियासत में चमोली मंत्री बनने की दौड़ में शामिल थे, कोई फैसला नहीं होने पर वह सेफ गेम खेलते हुए दोबारा मेयर पद के लिए दावेदारी कर सकते हैं। हालांकि चमोली खुद को चर्चा से अलग करते हैं। कहते हैं कि वह भाजपा के सच्चे सिपहसलार हैं, संगठन की ओर से उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे निभाएंगे।