जहां चाह, वहां राह... यह लाइन देहरादून व टिहरी की सीमा पर मौजूद भरवाकाटल गांव के लोगो पर सटीक बैठती है।
कुछ दिन पहले तक जौनपुर ब्लॉक में स्थित इस गांव में चार पहिया वाहन नहीं जा सकते थे, लेकिन शासन-प्रशासन को आईना दिखाते हुए ग्राम प्रधान बीनू बिष्ट और गांव वालों ने मिलकर यह रास्ता तैयार कर लिया। गांव वालों ने लगभग 80 फीसदी रास्ता तैयार कर लिया है।
सरकार ने किये तमाम दावे
सरकार ने भरवाकाटल को अटल आदर्श ग्राम घोषित कर गांव के लिए तमाम बुनियादी सुविधाएं जुटाने के दावे तो किए, लेकिन वर्षों बाद भी गांव के लिए मार्ग नहीं बन पाया। ग्रामीणों ने मार्ग के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन तक के दरवाजे खटखटाए, लेकिन हर जगह से कोरे आश्वासन ही मिले।
कुमाल्डा से भरवाकाटल तक के लिए एक किलोमीटर मार्ग निर्माण को जिला योजना में शामिल कर इसके लिए 33.51 लाख का प्रस्ताव भी तैयार किया, इसके बावजूद मार्ग नहीं बन पाया। पूर्व प्रधान जयकृष्ण उनियाल बताते हैं कि शासन-प्रशासन की अनदेखी पर प्रधान बीनू बिष्ट के नेतृत्व में कुछ ग्रामीणों ने खुद ही मार्ग तैयार करने का निर्णय लिया।
सरकारी मदद भी नहीं लेने का फैसला
सरकारी मदद भी नहीं लेने का फैसला किया गया। प्रधानबीनू बिष्ट ने प्रकाश सिंह पंवार, वन पंचायत सरपंच बनवारी लाल, प्रेमदास, राजेंद्र सिंह आदि ग्रामीणों की मदद ली। इसके बाद तीन सितंबर से मार्ग तैयार करने का काम शुरू किया गया। जिसका अस्सी फीसदी काम पूरा हो चुका है। ग्रामीण बताते हैं कि 38 परिवार वाले इस गांव में अब आसानी से चार पहिया वाहन पहुंच सकता हैं।
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