पिछली भाजपा सरकार में राजस्व मंत्री रहे यूकेडी नेता दिवाकर भट्ट के बेटे के नाम श्यामपुर ग्राम पंचायत की जमीन अदला-बदली करने का आदेश राजस्व परिषद ने निरस्त कर दिया है।
लेखपाल की गवाही के आधार पर यह भी माना गया है जमीन की अदला-बदली में दिवाकर भट्ट के मंत्री होने का प्रभाव भी रहा है। वहीं परिषद ने तत्कालीन सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।
आदेश के बाद शिकायतकर्ता और श्यामपुर के पूर्व प्रधान हेमराज ने प्रशासन से जमीन को दोबारा ग्राम सभा के खसरा नंबर में दर्ज करने की मांग की है।
यह था मामला
DIWAKAR BHATT
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प्रदेश की भाजपा सरकार में राजस्व मंत्री रहे और इस समय उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट के बेटे ललित भट्ट ने वर्ष 2009 में एक प्रार्थना पत्र उप जिलाधिकारी को देते हुए बताया था कि उनकी श्यामपुर नौआबाद में जमीन है, लेकिन जमीन पर जाने के लिए रास्ता नहीं है।
ग्राम समाज की खाली पड़ी भूमि को उनकी जमीन के बदले विनिमय (अदला-बदली) कर दी जाए। सहायक कलेक्टर ने 23 मार्च 2010 को प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए ललित भट्ट की भूमि ग्राम समाज और ग्राम समाज की भूमि ललित भट्ट के नाम दर्ज करने के आदेश कर दिए थे।
इस आदेश के विरुद्ध श्यामपुर के तत्कालीन प्रधान हेमराज ने पांच सितंबर 2012 को आपत्ति दाखिल की, लेकिन इसे सहायक कलेक्टर ने निरस्त कर दिया। जिसके बाद हेमराज ने राजस्व परिषद का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए राजस्व परिषद ने पाया कि मामले में भूमि व्यवस्था नियमावली का उल्लंघन हुआ है।
लेखपाल की आख्या में मंत्रीजी का दबदबा दिखा
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प्रस्ताव पास करने में सक्षम अधिकारी की अनुमति नहीं ली गई है। लेखपाल की आख्या से यह साफ हो जाता है ऐसा ललित भट्ट के पिता जो राजस्व मंत्री रहे हैं, उनके प्रभाव में किया गया है। ग्राम समाज की भूमि सड़क किनारे और ललित भट्ट की भूमि नदी तल में स्थित थी।
ऐसे में तहसील कर्मचारियों ने दोनों भूमियों का मूल्यांकन भी त्रुटिपूर्ण और अवास्तविक किया है। राजस्व परिषद ने हैरानी जताई है कि जिला राजस्व प्रशासन (जिलाधिकारी) के संज्ञान में आने के बाद भी उन्होंने सहायक कलेक्टर के फैसले पर कोई विधिक कार्रवाई नहीं की और न निगरानी प्रस्तुत की।
यदि जांच हुई और अनियमितता मिली थी तो राज्य सरकार मूकदर्शक कैसे बन गई। परिषद के न्यायिक सदस्य पीएस जंगपांगी ने सुनवाई करते हुए 23 मार्च 2010 के आदेश निरस्त करने के आदेश दिए हैं। इस आदेश के साथ श्यामपुर के पूर्व प्रधान हेमराज ने जिलाधिकारी दीपक रावत को पत्र सौंपते हुए मांग की है कि ललित भट्टके नाम दर्ज की गई भूमि के दस्तावेजों में फिर से ग्राम समाज का नाम दर्ज किया जाए।
मामले में लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट देते हुए कहा कि उसके हस्ताक्षर खाली कागज पर यह कहकर कराए गए थे कि जमीन पर चिकित्सालय और पशु चिकित्सालय का निर्माण किया जाना है। पूरे मामले में सहायक कलेक्टर सहित कई तहसील कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ है कि मामला बेटे से जुड़ा होने के चलते तत्कालीन राजस्व मंत्री दिवाकर भट्ट का प्रभाव रहा है।