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अंग्रेजों के जमाने का वॉटर सप्लाई सिस्टम

Mon, 14 Jul 2014 06:39 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, अल्मोड़ा
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देहरादून के लोगों की सेहत दम तोड़ चुके अंग्रेजों के जमाने के वॉटर फिल्टरेशन प्लांट के भरोसे छोड़ दी गई है।
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अंग्रेजों ने तैयार किया सप्लाई सिस्टम
वर्षों पुराने इन प्लांटों की न तो मरम्मत की गई है, न ही मानीटरिंग की जा रही है। ऐसे में जल संस्थान के पानी के साफ (बैक्टीरिया मुक्त) होने के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजधानी में वॉटर सप्लाई सिस्टम आजादी से पहले अंग्रेजों ने तैयार किया था। शहर की अधिकतर पेयजल लाइनें भी 50 साल से अधिक पुरानी हैं।

आधी आबादी को पानी देने वाले दिलाराम स्थित वाटर वर्क्स का फिल्टरेशन प्लांट वर्ष 1936 में लगाया गया था। सूत्र बताते हैं कि इन प्लांटों और लाइनों की स्थिति अब बदतर हो चुकी है।
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प्लांट खराब होने से जहां पानी की सफाई मुश्किल है, वहीं लाइनों की मरम्मत न होने से जगह-जगह गंदगी पानी में मिल रही है। बताया जा रहा है कि समय-समय पर प्लांट का माडल बदला जाना चाहिए।

फिल्टर मीडिया की लगातार मानीटरिंग होनी चाहिए, लेकिन जल संस्थान में दून में ऐसा कुछ नहीं कर रहा है। इसके बजाय बड़ी आबादी को सीधे पेयजल स्रोतों से पानी दिया जा रहा है। यह पानी राजधानी की सेहत पर खतरा बन रहा है।
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यह है फिल्टर मीडिया का काम
फिल्टर मीडिया अलग-अलग चरणों में बैक्टीरिया को हटाने, मिट्टी को बिठाने और पानी छानने का काम करता है। फिल्टरेशन प्लांट में पानी की सफाई तीन से चार स्तरों में की जाती है।

लेकिन मॉनीटरिंग न होने से प्लांट के खराब पार्ट बदले नहीं जाते। इससे पानी अलग-अलग स्तरों में जाता तो है, लेकिन साफ नहीं होता।

कौन प्लांट कितना पुराना
वाटर वर्क्स: वर्ष 1936
केसरवाला: वर्ष 1984
शहंशाही: वर्ष 1985

यह बात सही है कि फिल्टरेशन प्लांट पुराने हो चुके हैं। इनकी मरम्मत का काम एडीबी के जरिये कराया जा रहा है।
- डीडी डिमरी, मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान

एडीबी के तहत वाटर वर्क्स और शहंशाही के फिल्ट्रेशन प्लांट की मरम्मत का काम किया जाना है। जल्द ही काम पूरा कर लिया जाएगा।
- प्रभात राज, उप कार्यक्रम निदेशक, एडीबी
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