पिता ने दिया खेल मैदान में डटे रहने का हौसला
रोशनाबाद स्टेडियम में बिना जूतों के प्रवेश नहीं करने दिया जाता था। यही वजह थी कि दोनों बहनें स्कूल से जल्दी आकर बारी-बारी से उसके जूते पहनकर स्टेडियम में खेलने के लिए चले जाया करती थी। उनके पिता नाहर सिंह ने भी उन्हें खेल मैदान में डटे रहने का हौसला दिया।
हॉकी में कड़ी मेहनत के बूते विश्व में कमाया नाम
हॉकी में अपनी कड़ी मेहनत व संघर्ष के बूते विश्व में नाम कमाने वाली वंदना कटारिया को 2022 में पद्यश्री पुरस्कार मिला। वह 2017 में महिला एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य रही।
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पिता का सपना पूरा कर रही बेटी
देहरादून। वंदना कटारिया की मां सौरण देवी बताती हैं कि उनकी बेटी हॉकी में नाम रोशन कर रही हैं। इससे परिवार के सभी लोग खुश हैं। उसके पिता ने उसके लिए जो सपना देखा था उसे वह पूरा करने में लगी है।