सुरंग के अंदर ऑगर मशीन से ड्रिलिंग में बार-बार बाधाओं के बाद अब ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग की जा रही, जिसमें कुल 86 मीटर की ड्रिलिंग की जानी है जो कि सुरंग 305 मीटर के आसपास के प्वाइंट पर खुलेगी। हालांकि, बीच में लोहे के गार्टर बाधा बनेंगे, जिन्हें भेदना ड्रिलिंग मशीन की रिक के लिए काफी मुश्किल होगा।
अगर यहां कुछ भी गड़बड़ हुई तो सुरंग को भी नुकसान पहुंच सकता है। एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद का कहना है कि यह चुनौतीपूर्ण और मुश्किल काम होगा, लेकिन गार्डर की कटिंग के लिए कटर का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद सुरंग के अंदर तक एस्केप पैसेज तैयार हो जाएगा और अंदर फंसे श्रमिकों को बाहर निकाल लिया जाएगा।
देरी से ड्रिलिंग पर उठ रहे सवाल
हादसे के दूसरे दिन ही श्रमिकों को बचाने के लिए पांच प्लान तैयार कर लिए गए, जिसमें वर्टिकल ड्रिलिंग भी शामिल था। इसके लिए जरूरी मशीनें भी मंगवा कर रख ली गईं थीं, लेकिन वर्टिकल ड्रिलिंग पर काम हादसे के 14 दिन बाद रविवार से शुरू हुआ। यह काम शुरुआत में ही कर लिया होता तो अब तक 86 मीटर की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी होती।