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Uttarkashi: दरक रहा दयारा...भूस्खलन और भू-धंसाव की चपेट में मखमली घास का मैदान, इस वजह से बढ़ी समस्या

Mon, 19 Aug 2024 05:16 PM IST
अलका त्यागी अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी

सार

वर्ष 2019-20 में जब दयारा बुग्याल में भूस्खलन और भू-धंसाव की तस्वीरें सामने आई थी तो वन विभाग ने इसे बचाने के लिए पहल की थी। तब ओडिशा से जूट और नारियल के रेशों से तैयार जाल (केयर नेट) के कई बंडल मंगवाए गए थे, जिन्हें बिछाकर भूस्खलन और भू-धंसाव को रोकने को प्रयास किया गया था।
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दयारा बुग्याल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमालय की गोद में फैला मखमली घास का मैदान दयारा बुग्याल दरक रहा है। यह भूस्खलन और भू-धंसाव की चपेट में है। पूर्व में यहां वन विभाग ने सुरक्षात्मक कार्य भी करवाए थे, लेकिन सुरक्षात्मक कार्य के बावजूद भी भूस्खलन और भू-धंसाव नहीं थम रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बुग्याल संरक्षण योजना के तहत दोबारा से दयारा बुग्याल के संरक्षण के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा।

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उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर और समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल करीब 28 वर्ग किमी में फैला हुआ है। वर्ष 2019-20 में जब दयारा बुग्याल में भूस्खलन और भू-धंसाव की तस्वीरें सामने आई थी तो वन विभाग ने इसे बचाने के लिए पहल की थी।

तब ओडिशा से जूट और नारियल के रेशों से तैयार जाल (केयर नेट) के कई बंडल मंगवाए गए थे, जिन्हें बिछाकर भूस्खलन और भू-धंसाव को रोकने को प्रयास किया गया था। लेकिन हाल में यहां हुए पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव(बटर फेस्टिवल) में फिर से यहां भूस्खलन और भू-धंसाव की डराने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, इससे साफ है कि यहां वन विभाग की ओर से पूर्व में कराए सुरक्षात्मक कार्य से भी बुग्याल में सक्रिय भूस्खलन व भू-धंसाव नहीं थम रहा है।
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इसका एक कारण यहां नियमित समय अंतराल पर सुरक्षात्मक कार्य न किया जाना भी है, जिसे वन विभाग के अधिकारी भी स्वीकारते हैं। ऐसे में समय रहते दयारा के संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की गई तो यह प्राकृतिक धरोहर धीरे-धीरे नष्ट हो सकती है।

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तो सिंकिंग जोन में होने से हो रहा है भू-धंसाव

डीएफओ डीपी बलूनी ने बताया कि दयारा बुग्याल सिंकिंग(धंसाव) जोन के अंतर्गत आता है। बताया कि भटवाड़ी से लेकर पूरा ऊपरी क्षेत्र ही धंसाव क्षेत्र मे हैं। नीचे का क्षेत्र धंसने से ऊपरी बुग्याल क्षेत्र में दरारें पड़ रही हैं। दरारें चौड़ी होने और उनमें पानी घुसने से भूस्खलन और भू-धंसाव तेज हो रहा है। बताया कि संवेदनशील इस क्षेत्र में लंबी दूरी की पेट्रोलिंग के दौरान दरारों और भूस्खलन आदि की निगरानी की जाती है।

दयारा बुग्याल में भूस्खलन और भू-धंसाव को रोकने के लिए करीब चार-पांच साल पूर्व कार्य हुआ था। उसके बाद से वहां पर कोई कार्य नहीं हुए हैं। बुग्याल संरक्षण योजना के तहत इसे लेकर प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा।
-डीपी बलूनी, डीएफओ उत्तरकाशी वन प्रभाग।
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