केदारनाथ ही क्यों ?
समुद्र तल से 3,583 मीटर ऊपर मंदाकिनी के तट पर स्थित चार धाम (चार तीर्थ) में से एक, केदारनाथ भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों (शिव को समर्पित तीर्थ) में से ग्यारहवां है। दक्षिण क्षेत्र का केदारनाथ से धार्मिक रिश्ता है। उनकी केदारधाम में गहरी आस्था है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी केदारनाथ से अलग जुड़ाव है। वह छह बार केदारनाथ आ चुके हैं। तमिल लोग शिव के उपासक हैं। हर साल यात्रा के दौरान तमिलनाडु और कर्नाटक और केरल सहित अन्य दक्षिणी राज्यों के हजारों लोग केदारनाथ आते हैं।
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संगमम होने के मायने
सांस्कृतिक परंपराओं और ज्ञान के संगम को संगमम कहा जाता है। काशी-तमिल संगमम के आयोजन के खास मायने हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अभियान को मजबूती देने के लिए संगमम सरीखे आयोजन कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर व दक्षिण के ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं को एक-दूसरे के करीब लाना है। साझा विरासत की समझ बनाना और दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच संबंध को मजबूत करना भी इसका उद्देश्य है।