अब, रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से केदारनाथ तक के मौसम पल-पल सटीक जानकारी मिल सकेगी। साथ ही मध्य हिमालय में हो रहे जलवायु परिवर्तन को लेकर नए शोधों में भी मदद मिलेगी।
शासन द्वारा उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट के तहत जनपद में रुद्रप्रयाग व केदारनाथ सहित 7 स्थानों पर स्व चालित मौसम स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी केंद्रों का संचालन शुरू हो जाएगा, जिससे क्षेत्र में बारिश, बर्फबारी, तापमान, नमी, वायुदाब की हर समय जानकारी मिलती रहेगी।
जून 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद से रुद्रप्रयाग जनपद और विशेषकर केदारनाथ क्षेत्र के मौसम के पूर्वानुमान को लेकर शासन, प्रशासन गंभीर है। मौसम की सही जानकारी मिलने से समय पर प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए जनपद में 7 स्थानों पर स्वचालित मौसम केंद्र और हाइड्रोमेट्रोलोजिकल उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं।
इनके माध्यम से रुद्रप्रयाग से केदारनाथ के मौसम के वर्तमान और पूर्वानुमान की पलपल की सही व समुचित जानकारी मिल सकेगी। एस्ट्रा माइक्रोवेब प्रोडक्ट्स लिमिटेड फर्म द्वारा जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग, अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ, सोनप्रयाग, दुगलबिट्टा, चोपता और केदारनाथ में इन उपकरणों को स्थापित किया जा रहा है।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों की मदद से ये मौसम केंद्र व हाइड्रोलोसैटेलाइट उपकरण सेटेलाइट से लिंक किए गए हैं। इन उपकरणों से संबंधित क्षेत्रों की बारिश, बर्फबारी और तापमान के साथ, आद्रता, वायुदाब की जानकारी मिलेगी। केंद्रों के संरक्षण के लिए दो-दो कर्मचारियों की तैनाती होनी है, जिन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी हरीश चंद्र शर्मा ने बताया कि जल्द सभी केंद्रों का संचालन शुरू हो जाएगा। बता दें कि एचएनबी केविवि श्रीनगर गढ़वाल के हैप्रेक द्वारा भी नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज के अंतर्गत बीते वर्ष नवंबर में बनियाकुंड में आधुनिक मौसम यंत्र स्थापित किया गया है।
स्वचालित मौसम केंद्रों व अन्य उपकरणों की मदद से रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक के मौसम की सही व समय पर जानकारी मिलती रहेगी। मौसम के आंकड़ों के आधार पर बेहतर पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा, जो कई मायनों में खास रहेगा।
- डीके वर्मा, सेवानिवृत्त वरिष्ठ मौसम विज्ञानी, मौसम विभाग भारत सरकार, नई दिल्ली