कांग्रेस ने देहरादून में 250 दुपहिया वाहनों की व्यवस्था की है, जिसमें सवार होकर पार्टी कार्यकर्ता पूरे शहर पर नजर रखेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार, सुबह आठ बजे कांग्रेस भवन में सभी कार्यकर्ता इकट्ठा होंगे। इसके बाद, दुपहियों में सवार होकर सभी घंटाघर आदि क्षेत्र में जाएंगे और व्यापारियों से दुकान बंद रखने की अपील करेंगे। इसके बाद, सभी कांग्रेस भवन वापस आ जाएंगे। एनएसयूआई और युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं की टोली दुपहिया वाहनों पर सवार होकर पूरे शहर में बंद कराएंगे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी दुपहिया वाहन पर ही सवार होकर बंद के लिए लोगों से अपील करने का निर्णय लिया है।
घंटाघर होगा कांग्रेस का कंट्रोल रूम
कांग्रेस ने घंटाघर में अस्थायी तौर पर कंट्रोल रूप की व्यवस्था की है। इस जगह पर कांग्रेस के चार वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे और पूरे शहर की जानकारी लेते रहेंगे। जिन चार नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। उसमें अशोक वर्मा, प्रमोद कुमार सिंह, डॉ.विजेंद्र सिंह और अर्जुन सोनकर है।
एक दर्जन से ज्यादा संगठन पक्ष में
कांग्रेस ने दावा किया है कि राजधानी में एक दर्जन से ज्यादा संगठनों ने भारत बंद को समर्थन देने का एलान किया है। कांग्रेस के दून महानगर जिलाध्यक्ष लाल चंद्र शर्मा के अनुसार, सियासी दलों के अलावा, कई संगठन समर्थन में आगे आए हैं। इनमें पेट्रोल पंप एसोसिएशन, बार एसोसिएशन, राजपुर रोड व्यापार संघ, मोती बाजार व्यापार संघ, झंडा मुहल्ला व्यापार संघ, तिलक रोड व्यापार संघ, सैयद मुहल्ला व्यापार संघ, राजेंद्र नगर व्यापार संघ, दून डिस्ट्रिब्यूटर्स एसोसिएशन, दून वैली व्यापार संघ आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। शर्मा के अनुसार, उन्होंने, पूर्व विधायक राज कुमार, प्रदेश सचिव दीप वोहरा ने रविवार को कई क्षेत्रों में जाकर व्यापारियों से बंद के संदर्भ में समर्थन मांगा।
‘करो या मरो’ जैसी है दलों की चुनौती
भारत बंद को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति बन गई है। उत्तराखंड में मजबूत विपक्ष के तौर पर दिखाई देने के लिए कांग्रेस इस कार्यक्रम को हर हाल में सफल करना चाहती है। दूसरी तरफ, राज्य की सत्ता में काबिज भाजपा के सामने महंगाई पर बंद की सफलता से कई सवाल खडे़ हो जाएंगे। भाजपा पर इस बात का भी दबाव है कि व्यापारिक संगठनों में उसका ज्यादा दबदबा माना जाता है।
इन स्थितियों के बीच, व्यापारी संगठनों के लिए असमंजस की स्थिति बन गई है। वह भारत बंद के केंद्र में हैं, क्योंकि बाजार बंद की स्थिति से ही पूरे कार्यक्रम की सफलता या असफलता का निर्धारण होना है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के पक्षधर माने जाने वाले कई व्यापारियों ने अंदरखाने बंद की सफलता का भरोसा दिलाया है, लेकिन वह औपचारिक तौर पर सामने नहीं आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की तरफ से भी व्यापारियों से संपर्क किया गया है कि वह बंद में सहयोग न करें। दूसरी तरफ, कांग्रेस का हर छोटा-बड़ा नेता रविवार को गली मुहल्लों में खूब घूमा और बंद के लिए सहयोग मांगा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी कई व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि सपा और सीपीआई जैसे सियासी दलों ने भी बंद को समर्थन देने का एलान किया है।