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आफत की बारिश: कुमाऊं में 53 सड़कें बंद, भारत का चीन सीमा से संपर्क कटा, खतरे के निशान पर शारदा नदी

Wed, 29 Jul 2020 11:14 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़/बागेश्वर

सार

  • कपकोट में बालीघाट-धरमघर मार्ग पर कलवर्ट ध्वस्त, इसमें गिरी कार
  • कपकोट के पुड़कुनी में मकान ध्वस्त, एक मकान में दरार आई
  • कई घरों में मलबा घुसा, पानी की योजनाएं ध्वस्त, खेत मलबे से पटे
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के विभिन्न हिस्सों में लगातार बारिश से सीमांत के लोग सहमे हुए हैं। तवाघाट-सोबला, थल-मुनस्यारी और जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क के बंद होने से भारत का चीन सीमा से संपर्क कट गया है। सड़कें बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों की 15 हजार से अधिक की आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शीघ्र बंद सड़कों को खोलने की मांग की है।

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कपकोट क्षेत्र में बारिश ने जबरदस्त तबाही मचाई। बालीघाट-धरमघर मार्ग पर पर कलवर्ट ध्वस्त होने से एक कार उसमें समा गई। कपकोट के पुड़कुनी में एक आवासीय मकान ध्वस्त हो गया है, जबकि कई घरों में मलबा घुस गया है। खेत मलबे से पटे हैं। उडियार समेत कई पेयजल योजनाएं ध्वस्त हो गई हैं। इधर, केलाखेड़ा (ऊधमसिंह नगर) में नाले में डूबने से नगर के मोहल्ला आजादनगर निवासी शमशाद के तीन वर्षीय बेटे अफसान की मौत हो गई।


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बागेश्वर में सरयू नदी का जलस्तर चेतावनी लेवल से पास पहुंच गया है। गोमती नदी भी उफान पर है। सरयू का जलस्तर बढ़ने से पुलिस ने नदी किनारे के लोगों को तट पर न आने की अपील की गई है। जलस्तर बढ़ने से सरयू के घाट जलमग्न हो गए हैं। गरुड़ में बारिश से गोमती और गरुड़ गंगा का जल स्तर काफी बढ़ गया है। 

कुमाऊं में 53 सड़कें बंद

आपदा ने बंगापानी तहसील के गांवों में भारी तबाही मचाई है। जहां तक नजर जा रही है केवल तबाही का ही मंजर नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि पुल और सड़कें बह जाने से लोग एक गांव से दूसरे गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। लगातार हो रही बारिश से आपदा पीड़ित खेतों में एकत्र होकर रात गुजार रहे हैं। आपदा ने भले ही जख्म धरती को दिए हों लेकिन आंसू इंसानों के निकल रहे हैं। 

बंगापानी तहसील के टांगा गांव में 19 जुलाई को पहली बार भीषण विपदा आई थी। इस विपदा में 11 लोग जिंदा दफन हो गए थे। इसी रात बारिश ने मुनस्यारी के गैला गांव में भी एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जिंदगी लील ली थी। टांगा गांव के लोग अब जान बचाने के लिए चार किमी दूर सेरा स्कूल में बने कैंप में रह रहे हैं। अभी इस गांव के लोगों के लिए प्रशासन व्यवस्था भी नहीं कर पाया था कि बारिश ने 26 जुलाई की रात को धामी गांव में एक मकान को जमींदोज कर दिया था।

इस घटना में मां-बेटा जिंदा दफन हो गए, जिसमें अब तक महिला लापता है। इसी रात तेजम तहसील के गूंठी गांव में भी एक महिला की मलबे में दबने से मौत हो गई थी। धामी गांव में राहत बचाव का काम चल ही रहा था कि 27 जुलाई की रात मौसम ने क्षेत्र में फिर तबाही मचा दी। बरम के मेतली गांव और जाराजिबली में दो महिलाएं मलबे में जिंदा दफन हो गईं। इनमें से जाराजिबली में लापता महिला का अब तक सुराग नहीं लग पाया है। 

बंगापानी तहसील के मेतली, बगीचागांव, लुम्ती, जारा जिबली और मोरी गांवों में दूसरे दिन भी मदद नहीं पहुंच सकी है। सेना और एसडीआरएफ के जवान क्षेत्र में राहत एवं बचाव के प्रयासों में लगे हैं, लेकिन नदियों में पुल और संपर्क मार्गों के बह जाने से गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान तक लाना आसान नहीं है। मेतली, बगीचाबगड़, मोरी और जारा जिबली गांवों में सभी घरों में मलबा घुसा हुआ है। ग्रामीण बच्चों के साथ खेतों में रात गुजार रहे हैं। यही हाल मुनस्यारी तहसील के जोशा और धापा गांवों का भी है।

यहां के 60 से अधिक परिवार जंगल और खेतों में बने टेंटों में रह रहे हैं। लुम्ती के रमेश सिंह ने बताया कि गांव से बाहर निकलने का रास्ता नहीं है। अभी तक मदद नहीं पहुंची है। अधिक बारिश होते ही खेतों में चले जाते हैं। बंगापानी और बरम के बीच में पुल बहने से बंगापानी का संपर्क शेष दुनियां से कटा हुआ है। न यहां के लोग क्षेत्र से बाहर जा पा रहे हैं और नहीं कोई अधिकारी या अन्य मदद इन तक पहुंच पा रही है। क्षेत्र की सड़कें और रास्ते बंद होने से बीमार और गर्भवती महिलाओं को स्थानीय अस्पतालों तक पहुंचाने में भी लोगों के आंसू निकल रहे हैं। 
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शारदा का जलस्तर दो लाख क्यूसेक के पार

पहाड़ों में हुई वर्षा के बाद बुधवार को शारदा नदी का जलस्तर दो लाख क्यूसेक से अधिक हो गया। सुरक्षा के तहत यूपी सिंचाई विभाग के बनबसा स्थित शारदा हेडवर्क्स प्रशासन ने बैराज पर रेड अलर्ट कर वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी। नदी में अत्यधिक मलबा आने से यूपी सिंचाई विभाग ने शारदा नहर में और एनएचपीसी प्रशासन ने पावर चैनल में पानी छोड़ना बंद कर दिया है।

बुधवार दोपहर 12 बजे बाद नदी का जलस्तर 207312 क्यूसेक पहुंच गया। शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ बृजेश मौर्य ने बताया कि रात तीन बजे नदी का जलस्तर 97164 क्यूसेक था, जो सुबह छह बजे 117156 क्यूसेक पहुंचा। सुबह आठ बजे 112914, नौ बजे 126996, दस बजे 132198, 11 बजे 145973, 12 बजे 207312 क्यूसेक दोपहर दो बजे शारदा नदी का जलस्तर बढ़कर सर्वाधिक 228780 क्यूसेक पहुंच गया। हालांकि तीन बजे घटकर 219196 क्यूसेक रह गया।

शारदा बैराज के प्रभारी बैराज अटैंडेंट जेई संजय सिंह ने बताया कि नदी में अत्यधिक मलबा आने से करीब 12:30 बजे शारदा नहर की जलापूर्ति रोक दी गई। एनएचपीसी ने भी नदी में साफ पानी आने तक के लिए पावर चैनल की पानी सप्लाई बंद कर दी है। इससे पावर चैनल एवं नहर में पानी दोबारा छोड़ने तक एनएचपीसी एवं यूपीसीएल के लोहियाहेड पावर हाउस में बिजली बननी बंद हो गई है।

बनबसा में 79 मिमी बारिश रिकॉर्ड
बनबसा में पिछले 24 घंटे में बुधवार को 79 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। पिछले तीन दिनों में क्षेत्र में 180 मिमी वर्षा हो चुकी है। 29 जुलाई को क्षेत्र में 79 मिमी, 28 जुलाई को 44 मिमी और 27 जुलाई को 57 मिमी वर्षा हुई थी। 
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