आपदा ने बंगापानी तहसील के गांवों में भारी तबाही मचाई है। जहां तक नजर जा रही है केवल तबाही का ही मंजर नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि पुल और सड़कें बह जाने से लोग एक गांव से दूसरे गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। लगातार हो रही बारिश से आपदा पीड़ित खेतों में एकत्र होकर रात गुजार रहे हैं। आपदा ने भले ही जख्म धरती को दिए हों लेकिन आंसू इंसानों के निकल रहे हैं।
बंगापानी तहसील के टांगा गांव में 19 जुलाई को पहली बार भीषण विपदा आई थी। इस विपदा में 11 लोग जिंदा दफन हो गए थे। इसी रात बारिश ने मुनस्यारी के गैला गांव में भी एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जिंदगी लील ली थी। टांगा गांव के लोग अब जान बचाने के लिए चार किमी दूर सेरा स्कूल में बने कैंप में रह रहे हैं। अभी इस गांव के लोगों के लिए प्रशासन व्यवस्था भी नहीं कर पाया था कि बारिश ने 26 जुलाई की रात को धामी गांव में एक मकान को जमींदोज कर दिया था।
इस घटना में मां-बेटा जिंदा दफन हो गए, जिसमें अब तक महिला लापता है। इसी रात तेजम तहसील के गूंठी गांव में भी एक महिला की मलबे में दबने से मौत हो गई थी। धामी गांव में राहत बचाव का काम चल ही रहा था कि 27 जुलाई की रात मौसम ने क्षेत्र में फिर तबाही मचा दी। बरम के मेतली गांव और जाराजिबली में दो महिलाएं मलबे में जिंदा दफन हो गईं। इनमें से जाराजिबली में लापता महिला का अब तक सुराग नहीं लग पाया है।
बंगापानी तहसील के मेतली, बगीचागांव, लुम्ती, जारा जिबली और मोरी गांवों में दूसरे दिन भी मदद नहीं पहुंच सकी है। सेना और एसडीआरएफ के जवान क्षेत्र में राहत एवं बचाव के प्रयासों में लगे हैं, लेकिन नदियों में पुल और संपर्क मार्गों के बह जाने से गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान तक लाना आसान नहीं है। मेतली, बगीचाबगड़, मोरी और जारा जिबली गांवों में सभी घरों में मलबा घुसा हुआ है। ग्रामीण बच्चों के साथ खेतों में रात गुजार रहे हैं। यही हाल मुनस्यारी तहसील के जोशा और धापा गांवों का भी है।
यहां के 60 से अधिक परिवार जंगल और खेतों में बने टेंटों में रह रहे हैं। लुम्ती के रमेश सिंह ने बताया कि गांव से बाहर निकलने का रास्ता नहीं है। अभी तक मदद नहीं पहुंची है। अधिक बारिश होते ही खेतों में चले जाते हैं। बंगापानी और बरम के बीच में पुल बहने से बंगापानी का संपर्क शेष दुनियां से कटा हुआ है। न यहां के लोग क्षेत्र से बाहर जा पा रहे हैं और नहीं कोई अधिकारी या अन्य मदद इन तक पहुंच पा रही है। क्षेत्र की सड़कें और रास्ते बंद होने से बीमार और गर्भवती महिलाओं को स्थानीय अस्पतालों तक पहुंचाने में भी लोगों के आंसू निकल रहे हैं।
पहाड़ों में हुई वर्षा के बाद बुधवार को शारदा नदी का जलस्तर दो लाख क्यूसेक से अधिक हो गया। सुरक्षा के तहत यूपी सिंचाई विभाग के बनबसा स्थित शारदा हेडवर्क्स प्रशासन ने बैराज पर रेड अलर्ट कर वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी। नदी में अत्यधिक मलबा आने से यूपी सिंचाई विभाग ने शारदा नहर में और एनएचपीसी प्रशासन ने पावर चैनल में पानी छोड़ना बंद कर दिया है।
बुधवार दोपहर 12 बजे बाद नदी का जलस्तर 207312 क्यूसेक पहुंच गया। शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ बृजेश मौर्य ने बताया कि रात तीन बजे नदी का जलस्तर 97164 क्यूसेक था, जो सुबह छह बजे 117156 क्यूसेक पहुंचा। सुबह आठ बजे 112914, नौ बजे 126996, दस बजे 132198, 11 बजे 145973, 12 बजे 207312 क्यूसेक दोपहर दो बजे शारदा नदी का जलस्तर बढ़कर सर्वाधिक 228780 क्यूसेक पहुंच गया। हालांकि तीन बजे घटकर 219196 क्यूसेक रह गया।
शारदा बैराज के प्रभारी बैराज अटैंडेंट जेई संजय सिंह ने बताया कि नदी में अत्यधिक मलबा आने से करीब 12:30 बजे शारदा नहर की जलापूर्ति रोक दी गई। एनएचपीसी ने भी नदी में साफ पानी आने तक के लिए पावर चैनल की पानी सप्लाई बंद कर दी है। इससे पावर चैनल एवं नहर में पानी दोबारा छोड़ने तक एनएचपीसी एवं यूपीसीएल के लोहियाहेड पावर हाउस में बिजली बननी बंद हो गई है।
बनबसा में 79 मिमी बारिश रिकॉर्ड
बनबसा में पिछले 24 घंटे में बुधवार को 79 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। पिछले तीन दिनों में क्षेत्र में 180 मिमी वर्षा हो चुकी है। 29 जुलाई को क्षेत्र में 79 मिमी, 28 जुलाई को 44 मिमी और 27 जुलाई को 57 मिमी वर्षा हुई थी।