राजेश थापली बड़ी उम्मीदों से अपना मकान बना रहे थे, लेकिन यह मकान उन्हें जीवनभर का दर्द दे गया। उनके पुश्तैनी मकान के ऊपर ही पिलरों के सहारे निर्माण किया जा रहा था। हादसे के दौरान उनकी बेटी आस्था और बेटा आरव पुश्तैनी घर में पढ़ाई कर रहे थे। इस पहले की वे कुछ समझ पाते निर्माणाधीन मकान का एक हिस्सा पुश्तैनी मकान के ऊपर गिर गया। यह देख वहां चीखपुकार मच गई। अंदर से आस्था की दबी चींखे सुनाई दे रही थीं। वह पापा बचा लो की आवाजें लगा रही थीं, लेकिन आरव का कुछ पता नहीं चल पा रहा था।
पिता राजेश थापली ने जान की परवाह किए अपने बच्चों को बचाने के लिए पूरी ताकत झौंक दी। वे किसी तरह अंदर पहुंचे और अपनी बेटी को सुरक्षित बाहर निकाल लाएं, लेकिन अपने बेटे आरव को न बचा पाने का गम उन्हें जीवनभर रहेगा। आरव उनका एकलौता बेटा था। जैसे ही रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे जवान ने यह जानकारी दी कि आरव का शव दो लिंटरों के बीच फंसा है। यह सुन परिजनों में चीखपुकार मच गई। रेस्क्यूू ऑपरेशन में शामिल सभी अधिकारी और कर्मचारी मायूस हो गए। कड़ी मशक्कत के बाद आरव के शव को बाहर निकला जा सका। मासूम के शव को देख परिजन बिलख-बिलख कर रोने लगे। जिसने भी यह देख उसकी आंखें छलक गईं। राजेश थापली एक स्कूल में सिक्योरटी गार्ड हैं।
सांत्वना देने पहुंचे लोग
हादसे की खबर लगते ही क्षेत्रीय विधायक सहदेव सिंह पुुंडीर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नवीन ठाकुर, आप नेता अमित अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य यशपाल नेगी, गुलजार, अनीस अहमद आदि मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को राहत पहुंचाई।
यश और आर्यन ने पिलाया पानी
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दो बच्चों यश रावत (13) और आर्यन सिंह (10) ने भी अपना सहयोग दिया। उन्होंने ऑपरेशन में शामिल सभी लोगों को पानी पिलाया।