मलारी हाईवे शीघ्र खोलने सहित नीती घाटी में राशन और स्वास्थ्य सुविधा की मांग पर सोमवार को पूर्व दायित्वधारी ठाकुर सिंह राणा के नेतृत्व में सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने जोशीमठ में प्रदर्शन किया।
इसके बाद ठाकुर सिंह राणा ने तहसील परिसर में आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि चीन सीमा को जोड़ने वाला यह मार्ग 10 दिनों से बंद पड़ा है, लेकिन इस ओर कोई कार्रवाई प्रशासन की ओर से नहीं की जा रही है। क्षेत्र में आपदा प्रबंधन तंत्र भी पूरी तरह से फेल हो गया है।
वहीं नीती घाटी से लौटे पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य धीरेंद्र सिंह गरोड़िया, धर्मेंद्र पाल, खीम सिंह खाती, हरेंद्र सिंह और कुशल सिंह फोनिया ने बताया कि नीती घाटी में रह रहे मजदूरों के पास राशन खत्म हो गया है। ग्रामीण उन्हें खाना दे रहे हैं। तमक, जुम्मा, द्रोणागिरी, गरपक सहित आसपास के गांव के ग्रामीण भूस्खलन क्षेत्र में जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। क्षेत्र में बिजली न होने से ग्रामीण छिल्लों के सहारे रात गुजार रहे हैं।
वहीं कुमाऊं में टनकपुर-चंपावत के बीच स्वांला में पहाड़ से भारी मलबा आने से सड़क बंद हो गई है।
कुमाऊं की लाइफ लाइन हल्द्वानी-ज्योलीकोट-भवाली-कर्णप्रयाग हाईवे चार दिन बाद भी नहीं खोला जा सका है। शुक्रवार को वीरभट्टी में बैली ब्रिज के पास पहाड़ी से आए मलबे को एनएच अब तक नहीं हटा पाया है। विभागीय अधिकारियों का दावा था कि दो दिन में मार्ग पर यातायात सुचारु कर दिया जाएगा लेकिन सोमवार को भी हाईवे बंद रहा और उनके दावे हवा हवाई हो गए।
वीरभट्टी में ब्रिटिशकालीन पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद एनएच विभाग डबल लेन पुल बनवा रहा है। इसे इसी माह सुचारु होना था लेकिन बलियानाले से सटी पहाड़ी से शुक्रवार को भारी मात्रा में मलबा आने से हाईवे पर आवाजाही ठप हो गई। हालांकि, छोटे वाहनों को वाया भीमताल और बड़े वाहनों को वाया नैनीताल पहाड़ की ओर भेजा रहा है और यही रूट पहाड़ से आने वाले वाहनों के लिए भी है। फेरा बढ़ने से रोडवेज ने अपना किराया भी बढ़ा दिया है। इससे यात्रियों की जेब और ढीली हो रही है। इतना ही नहीं, नैनीताल में लोगों को जाम से दोचार होना पड़ रहा है।
कुमाऊं-गढ़वाल को जोड़ता है हाईवे
ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग हाईवे कुमाऊं-गढ़वाल को जोड़ता है। इसी हाईवे से बड़े वाहन राशन, सब्जी, गैस, डीजल, पेट्रोल, निर्माण सामग्री लेकर पहाड़ की ओर जाते हैं, लेकिन विभाग ने बरसात के मौसम में कटान शुरू कर पहाड़ी के निचले हिस्से को खोखला और कमजोर कर दिया है। इससे पहाड़ी से हाईवे पर मलबा आ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पहाड़ को काटा जा रहा है, वह भूगर्भीय दृष्टि से बेहद कमजोर है।