शासन की ओर से जारी एसओपी के मुताबिक बोर्डिंग, डे-बोर्डिंग स्कूल में छात्र-छात्राओं को अभिभावकों की सहमति के बाद ही स्कूल में भौतिक रूप से उपस्थिति होने की अनुमति दी जाएगी। स्कूल खुलने के तीन दिन में इस आशय की सहमति प्राप्त कर ली जाएगी। इसके अलावा स्कूल में भौतिक रूप में उपस्थित होने के लिए किसी भी छात्र-छात्रा को बाध्य नहीं किया जाएगा।
ट़यूशन फीस के अलावा नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क
शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन यह तय करेंगे कि बच्चों से शिक्षण शुल्क के अलावा अन्य गतिविधियों से सम्बन्धित शुल्क किसी भी दशा में न लिया जाय और न ही प्रथम चरण में पाठ्येत्तर गतिविधियों का आयोजन किया जाय।
स्कूल के पूरे स्टाफ का हो वैक्सीनेशन
आदेश में कहा गया है कि स्कूल के पूरे स्टाफ का वैक्सीशन जिला प्रशासन के सहयोग से प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
कक्षा एक से 5वीं तक के स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई के लिए करेंगे समय तय
कक्षा एक से 5वीं तक की कक्षाओं में भौतिक रूप से पठन-पाठन के साथ-साथ संबंधित स्कूल के ऑनलाइन पढ़ाई के लिए अभिभावकों के पास उपकरणों की उपलब्धता के आधार पर ऑनलाइन पढ़ाई के लिए समय तय करेंगे। जिन बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा नहीं है उनके लिए ऑफलाइन अधिगत सामग्री घर पर उपलब्ध कराने के लिए स्कूल स्तर पर विशेष कार्य योजना बनाई जाएगी।
स्कूलों में प्रार्थना सभा, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक
स्कूलों में प्रार्थना सभा, बाल सभा, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं अन्य सामुहिक गतिविधियाँ, जिसमें अधिक छात्र-छात्राओं द्वारा प्रतिभाग किया जाता है। उन पर अगले आदेश तक रोक रहेगी। अन्य गतिविधियों जिसमें कम से कम छात्र-छात्राओं का प्रतिभाग होता है को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए संचालित किया जा सकता है।
स्कूलों में बच्चों को अभी नहीं मिलेगा पका भोजन
स्कूलों में मध्याहन भोजन योजना की वर्तमान व्यवस्था जिसके तहत बच्चों को खाद्यान, मध्याहन भोजन सामग्री दी जा रही है को जारी रखते हुए स्कूलों में अभी पका-पकाया भोजन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, लेकिन भोजन माता नियमित रूप से स्कूल में उपस्थित रहेंगी। स्कूल परिसर में छात्र-छात्राओं को लंच बाक्स लाने की अनुमति प्रधानाचार्य व स्कूल प्रबन्धन कोविड दिशा निर्देशों का पालन कराते हुए अपने स्तर से निर्णय लेंगे।
प्रदेश में अलगे सप्ताह से खुलेंगे मैदानी जिलों के महाविद्यालय
प्रदेश में मैदानी जिलों के महाविद्यालय शीतकालीन अवकाश के बाद अगले सप्ताह से खुलेंगे। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. पीके पाठक के मुताबिक मैदानी जिलों में कुछ महाविद्यालय सात तो कुछ दस फरवरी से खुलेंगे। जबकि पर्वतीय जिलों में मतदान की तिथि के बाद महाविद्यालय खुलेंगे। उच्च शिक्षा निदेशक ने कहा कि इस बार महाविद्यालयों की ओर से अलग-अलग तिथि को शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया है। यही वजह है कि अलग-अलग तिथि से महाविद्यालय खुलेंगे।