200 करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले में 16 और अधिकारियों (वर्तमान व निलंबित) को एसआईटी जल्द गिरफ्तार करेगी। इसमें अब तक सात सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें पांच हरिद्वार और दो देहरादून के अधिकारी शामिल हैं। अनुराग शंखधर को दो बार गिरफ्तार किया जा चुका है।
वर्ष 2018 से अब तक सरकारी अधिकारियों समेत कुल 54 (अनुराग शंखधर को दो बार) लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी के 94 अधिकारी और शिक्षण संस्थान के मालिक (संचालक व अधिकारी) गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट से स्टे भी हासिल कर चुके हैं। एसआईटी के मुताबिक उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, हरियाणा आदि राज्यों के 22 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 38 हरिद्वार और 25 मुकदमे देहरादून में दर्ज हैं। यह मुकदमे कुल मुकदमों में शामिल हैं।
एसआईटी के अधिकारियों के मुताबिक शिक्षण संस्थानों के खिलाफ चल रही लगभग सभी जांचें पूरी हो चुकी हैं। कुल 51 मुकदमों में से 50 मुकदमों में चार्जशीट भेजी जा चुकी है। अब बारी सरकारी अधिकारियों की है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल 16 अधिकारी ऐसे हैं, जिनके खिलाफ जांच अंतिम दौर में है। एसआईटी इन्हें भी जल्द गिरफ्तार कर सकती है।
कार्रवाई से घबराए घपलेबाज शिक्षण संस्थानों ने पिछले दिनों 14.39 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लौटा दी थी। हालांकि, विभाग के पास इन संस्थानों के नाम की जानकारी नहीं थी। विभाग ने इसके लिए एक खाता अलग से खोला था, जिसमें चुपचाप इन संस्थानों ने पैसा लौटा दिया है। यह जानकारी भी आरटीआई कार्यकर्ता रविंद्र जुगरान को एक आरटीआई के जवाब में मिली थी।
करीब 200 करोड़ का है घोटाला
घोटाला जब सामने आया था उस वक्त लगभग 500 करोड़ रुपये के गबन की बात की जा रही थी, लेकिन अभी तक सभी मुकदमों की जांच में यह रकम करीब 200 करोड़ रुपये के आसपास है। हालांकि, एसआईटी ने इसका अभी पूरा आंकलन नहीं किया है। यह रकम इससे ज्यादा भी हो सकती है।
ये है कार्रवाई
कुल मुकदमें संस्थानों के खिलाफ - 51 (हरिद्वार) व 32 (देहरादून)
गिरफ्तार आरोपी- 48 (शिक्षण संस्थानों के मालिकान) और 07 (सरकारी अधिकारी)
स्टे प्राप्त आरोपी- 94
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मुकदमे- 38 (हरिद्वार) व 25 (देहरादून)