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Samvad: अमर उजाला के मंच पर बोले स्वामी गोविंद देव गिरी-उत्तराखंड के ऊर्जा रूपी प्रकाश से रोशन होता है देश

Mon, 05 Aug 2024 11:12 AM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

Uttarakhand Samvad 2024: संवाद कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए  स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि देशभर की पानी की जरूरत को पूरा करने वाला यह राज्य पानी की किल्लत से जूझ रहा है, जो कि चिंता का विषय है।
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स्वामी गोविंद देव गिरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि संपूर्ण विश्व को भारत से प्रकाश मिलता है और ऊर्जा रूपी प्रकाश से उत्तराखंड संपूर्ण देश को प्रकाशवान कर रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश को पानी देने वाली गंगा का उद्गम स्थल ही पानी की किल्लत से जूझ रहा है। उन्होंने पहाड़ी राज्य से प्रतिभाओं के पलायन और शिक्षा की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। स्वामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने पर राज्य सरकार की सराहना भी की।

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संवाद कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर की पानी की जरूरत को पूरा करने वाला यह राज्य पानी की किल्लत से जूझ रहा है, जो कि चिंता का विषय है। उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उदाहरण देते हुए बारिश के जल को संरक्षित कर उपयोग करने की सलाह दी। स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में अनेक समस्याएं हैं। यहां की प्रतिभा शिक्षा की कमी के कारण पलायन को मजबूर है। जिस भूमि पर महार्षि वेद व्यास ने महाभारत और वेदों की रचना की वहां से शिक्षा और रोजगार के लिए युवाओं का पलायन हम सबके लिए चिंतनीय विषय है।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे राज्य के विकास में भागीदार बने। उन्होंने कहा कि युवाओं को राज्य के विकास के लिए आगे आना चाहिए। इसके लिए राज्य और केंद्र भी उनके साथ खड़े रहेंगे। स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता लागू करके राज्य को देश में शीर्ष स्थान पर ला दिया है।
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महाभारत पढ़ने के बजाय महान भारत के निर्माण में सहभागी होना जरूरी
उन्होंने कहा, चातुर्मास में सन्यासियों का कहीं भी जाना वर्जित होता है। मैं इन दिनों महाभारत की कथा में व्यस्त था, लेकिन जब बात उत्तराखंड और अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम की बात हुई, तो मुझे लगा कि महाभारत को पढ़ने से ज्यादा उपयोगी महान भारत के निर्माण के प्रयास में सहभागी होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

महाभारत है संपूर्ण ग्रंथ
महाभारत पर केंद्रित रहते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर उनसे पूछा जाता है कि आप श्रीमद्भागवत पुराण, रामायण के बजाय महाभारत को इतना महत्व क्यों देते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि संपूर्ण वेदों का सार जिस ग्रंथ में आता है और जिसे पंचम वेद कहा गया है उस महाभारत के शंखनाद के बिना भारत महान नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि महाभारत में वो सब मिलेगा जो कहीं नहीं है। यह ग्रंथ ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म, धर्म, नीति, शस्त्र-शास्त्र से परिपूर्ण है।

संवाद में हुए मंथन से निकलेगा अमृत
गोविंद देव गिरी ने कहा कि अमर उजाला के इस संवाद के मंथन से ऐसा अमृत निकले जो देश और उत्तराखंड के विकास में सहायक सिद्ध हो। साथ ही युवाओं के मार्गदर्शन में सहायक हो और सरकार जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बने। ऐसी मैं उम्मीद करता हूं।
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