फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amar Ujala Samvad: अमोघ लीला प्रभु ने प्रबंधन के छह पाठ में खोला सफलता का राज, आप भी जान लेंगे तो रहेंगे खुश

Mon, 05 Aug 2024 11:05 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

अमर उजाला संवाद मंच से अमोघ लीला प्रभु ने अपने खास अंदाज से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने आत्म, प्रयत्न, संगति, रिश्तों, भावनाओं और समय प्रबंधन के गुर सिखाए।
विज्ञापन
अमोघ लीला प्रभु - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे प्रेरक वक्ता और कृष्ण भक्त अमोघ लीला प्रभु ने प्रबंधन के छह पाठों से सफलता का राज खोल दिया। उन्होंने अंग्रेजी शब्द सीक्रेट का विन्यास (एसईसीआरईटी) कर इसके अक्षरों से इन छह प्रबंधनों को विस्तार से लोगों को बताया।

हंसमुख अंदाज और भाषा शैली से मानों सभी के जहन में उनकी ये बातें किसी सूत्र की तरह समा गईं। बताया, जीवन के किसी भी पड़ाव में अगर ये प्रबंधन सीख लिए तो सफलता निश्चित है। मानव जीवन से जुड़े इन प्रबंधनों को सुनकर कार्यक्रम में बैठे कई लोगों ने प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं को भी शांत किया।

कुछ इस तरह बताया सफलता का राज

एस- सेल्फ मैनेजमेंट (आत्म प्रबंधन)

दूसरों को आगे बढ़ते देख सीखें खुश होना

अमोघ ने आत्म प्रबंधन को सफलता की पहली सीढ़ी बताया। कहा, जीवन में ईर्ष्या, द्वेष और द्वंद्व सभी के मन में कभी न कभी आता है, लेकिन इन्हें जब व्यक्ति संभालना सीख जाता है, तो वह अपने आप का प्रबंधन हो जाता है। अपने को जानने से ही सफलता पाई जा सकती है। उन्होंने ईर्ष्या और द्वेष के अंतर को भी दर्शकों को कई उदाहरण देकर बताया। कहा, जिस दिन लोगों को आगे बढ़ते देखने से ईर्ष्या न करते हुए खुश होना सीख लिया, समझो सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ गए। कई बार बुद्धमान व्यक्ति खुद को दूसरों से अलग समझने लगता है, लेकिन उसकी यही बुद्ध उसकी मजबूती भी होती है और कमजोरी भी। लिहाजा, जीवन में हरेक से सलाह लेनी चाहिए।

विज्ञापन

ई-एफर्ट मैनेजमेंट (प्रयत्न प्रबंधन)

स्वभाव के अनुसार करें काम का चुनाव

बिना प्रयत्न किए कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है। प्रयत्न करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। शेर का उदाहरण देते हुए बताया, शेर हिरन के शिकार का छह बार प्रयत्न करता है, तब एक बार सफल होता है। पांच बार उसे असफलता ही हाथ लगती है। ऐसे में वह पांच बार की असफलता को सोचकर शिकार न करे तो भूखा ही रह जाएगा, लेकिन प्रयत्न भी उसी दिशा में करना चाहिए जैसा मनुष्य का स्वभाव होता है। इसके लिए उन्होंने पुरानी वर्ण व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) का उदाहरण देकर बताया कि उस समय स्वभाव के अनुसार ही काम किया जाता था।

सी-कंपनी मैनेजमेंट (संगति प्रबंधन)

टेक्नोलॉजी को नौकर बनाएं मालिक नहीं

मनुष्य की सफलता उसकी संगति पर बहुत हद तक निर्भर करती है। जैसी उसकी संगति होगी उसी हिसाब से उसके अगले कर्म होते हैं। वर्तमान पीढ़ी की संगति गैजेट्स के साथ है। गैजेट्स में संवेदनशीलता नहीं रहती है। यही कारण है कि उसकी संगति भी इसी प्रकार से होती जा रही है। हर कोई गूगल में अपनी समस्याओं का समाधान खोज रहा है। इसका असर यह भी हो रहा कि देश में लोग 81 प्रतिशत मोबाइल डाटा पोर्न देखने में खर्च करता है। ऐसे में सफलता के बारे में सोचना ही गलत होगा। टेक्नोलॉजी अच्छी बात है, लेकिन इसे नौकर बनाएं न कि मालिक। अच्छे लोगों की संगति से ही अच्छे काम और अच्छी आदतें सीखी जा सकती हैं।

आर-रिलेशनशिप मैनेजमेंट (रिश्तों का प्रबंधन)

अहंकार करता है हर रिश्ते की हत्या

चौथा प्रबंधन उन्होंने रिश्तों का प्रबंधन करना बताया। बताया, आज के समय में लोग फेसबुक पर तो रिश्ते बना रहे हैं, मगर अपने असल रिश्तों को समय नहीं दे रहे हैं। बताया, रिश्तों में बने रहने से ही मनुष्य पहचान मजबूत होती है। अकेला अंगूर सस्ता बिकता है, जबकि गुच्छे वाले अंगूर की लोग ज्यादा कीमत देते हैं। झाड़ू की सींक कहीं गिर जाए तो वह कूड़ा कहलाती है, लेकिन यही सींक कई अन्य सींकों के साथ मिलकर मिलकर झाड़ू बनकर कूड़े को साफ करती है। लिहाजा, रिश्ते बेहद संभालकर और ध्यान देकर बनाने की जरूरत होती है। दूध और पानी की दोस्ती सबसे गाढ़ी होती है, लेकिन नींबू की एक बूंद दोनों को अलग कर देती है। इसी तरह किसी भी मजबूत रिश्ते में जब अहंकार आता है तो वह रिश्तों की हत्या कर देता है।

ई-इमोशन मैनेजमेंट : (भावनाओं का प्रबंधन)

भावनाओं को संभालना सीखें

सफलता के लिए भावनाओं का प्रबंधन भी बेहद जरूरी है। कई बार लोग भावनाओं में ऐसे बह जाते हैं कि कोई काम हो ही नहीं पता है। ऐसे में जरूरी है कि इनका प्रबंधन करें। उन्होंने रामभक्त समर्थ रामदास की कहानी का उदाहरण दिया। रामदास कथा में बताते थे कि अशोक वाटिका के फूल सफेद थे। वहां हनुमान पहुंचे तो उन्होंने बताया कि फूल लाल थे। सीता को बुलाया तो उन्होंने कहा, फूल नीले थे। अंत में राम ने भावनाओं के भेद खोल दिए। राम ने कहा, फूल तो सफेद थे, लेकिन हनुमान ने उन्हें गुस्से में देखा तो वे लाल दिखे। सीता ने आंसुओं में देखे तो वे नीले दिखे। मनुष्य हर किसी चीज को अपनी भावनाओं से ही देखता है। ऐसे में इन पर काबू पाना बेहद जरूरी है।

ये भी पढ़ें...Kedarnath:  एमआई 17 और चिनूक से एयर लिफ्ट रेस्क्यू शुरू, 133 लोगों को निकाला जा चुका, मोर्चे पर डटी सेना

विज्ञापन

टी-टाइम मैनेजमेंट (समय प्रबंधन)

भूत और भविष्य को छोड़कर वर्तमान में जीएं

अंतिम और सबसे जरूरी प्रबंधन समय का प्रबंधन पर अमोघ लीला प्रभू ने जोर दिया। कहा, इन दिनों किसी के पास समय नहीं है, लेकिन समय निकालना पड़ता है। जो लोग कहते हैं कि समय नहीं है, यदि उन पर कोई डरा दे और कुछ काम करने को कहे तो उसी समय में से समय निकल जाएगा। असल में मनुष्य इस वक्त भूत और भविष्य को साथ लेकर वर्तमान में जीता है, जबकि भविष्य और भूत की चिंता छोड़कर वर्तमान को बेहतर बनाने में काम करना चाहिए। यह समय अच्छे संस्कार डालने के लिए बिताना चाहिए। गलती होती है तो उसे भी परिवार का हिस्सा बनाएं। उससे भी सीखें और समय का प्रबंधन करें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें