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उत्तराखंड: प्रदेश में फिर उठी पदोन्नति में आरक्षण की मांग, कर्मचारी बोले- नए सिरे से कानून बनाए सरकार

Fri, 01 Jan 2021 11:41 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • उत्तराखंड सचिवालय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कार्मिक बहुद्देशीय मानव संसाधन विकास कल्याण समिति ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
  • कहा, प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण रोकने के पूर्व शासनादेश निरस्त कर नए सिरे से कानून बनाया जाए
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कर्मचारी - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तराखंड में एक बार फिर पदोन्नति में आरक्षण की मांग उठने लगी है। शुक्रवार को उत्तराखंड सचिवालय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कार्मिक बहुद्देशीय मानव संसाधन विकास कल्याण समिति ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्यसचिव को ज्ञापन भेजकर यह मांग की है। 
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समिति का कहना है कि पूर्व में 2012 और 2020 में दो ऐसे शासनादेश जारी किए गए हैं जो कि पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था के खिलाफ हैं। ऐसे शासनादेशों को तत्काल निरस्त किया जाए। समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह और महासचिव कमल कुमार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पदोन्नति में आरक्षण के लिए प्रदेश में अलग से कानून बनाया जाए। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पिछले साल फरवरी में पदोन्नति में आरक्षण का जो आदेश जारी कर चुका है, उसी के क्रम में सरकार कानून बनाए।

यह हैं मुख्य मांगें -
- उत्तराखंड राज्य के अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोकसेवकों के लिए उत्तर प्रदेश सेवा अधिनियम 1994 की धारा-3,7 के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण की पुरानी व्यवस्था को लागू किया जाए।
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- इरशाद हुसैन आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखते हुए उत्तराखंड में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर कानून बनाया जाए।
- पदोन्नति में आरक्षण को निषेद्य करने वाले पांच सितंबर 2012 और 18 मार्च 2020 के शासनादेश को निरस्त किया जाए।
- सुप्रीम कोर्ट के सात फरवरी 2020 के आदेश के क्रम में तत्काल विधानसभा के माध्यम से कानून बनाकर 2012 से पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था शुरू की जाए। 
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पुरानी पेंशन के लिए चलेगा निर्णायक आंदोलन

प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली के लिए नए साल में निर्णायक आंदोलन चलाया जाएगा। शुक्रवार को अखिल भारतीय समानता मंच की ऑनलाइन बैठक में इस पर मंथन किया गया। 

अखिल भारतीय समानता मंच पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए सभी कार्मिक संगठनों, कार्मिकों शिक्षकों अधिकारियों और संघर्षरत संगठनों को एकजुट कर आंदोलन को और तेज करने का प्रयास करेगा। बैठक में उत्तराखंड के बुनियादी मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

उत्तराखंड में जितने भी पुरानी पेंशन लागू कराने की मांग को लेकर संघर्षरत संगठन, तमाम कार्मिक शिक्षक अधिकारी संगठन, सेवा संघ महासंघ संगठन व उनके पदाधिकारी सदस्य व  इसके छलावे से पीड़ित शोषित कर्मचारी शिक्षक अधिकारी हैं, अखिल भारतीय समानता मंच ने उत्तराखंड सकल कार्मिक समाज, उनके परिजनों के हित में निर्णायक संघर्ष व सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि समानता व संरक्षण हर एक नौकरीपेशा, कार्मिक शिक्षक अधिकारी या उनके सेवा संघों के सदस्यों, उनके परिजन का अधिकार है। 

बैठक में अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय महासचिव विनोद प्रकाश नौटियाल, मंच के केंद्रीय सचिव एलपी रतूड़ी, मीडिया प्रभारी वीके धस्माना, शमशेर सिंह महर, कैलाश चंद्र पुनेठा, पीसी तिवारी, एसपी सिंह कंडारी, एमडी सेमवाल, जीवन कठायत, डॉ. सती शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता श्याम लाल बिंजोला और संचालन प्रांतीय महासचिव जेपी कुकरेती ने किया।
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