उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों को इस तरह की भाषा शैली शोभा नहीं देती है। जो वीडियो और ऑडियो वायरल हो रहा है, उसमें बीजेपी के एक विधायक और मंत्री की आपसी बातचीत सुनाई दे रही है, जिसमें भाजपा विधायक वन्यजीव और मानव संघर्ष में हुए नुकसान को लेकर मंत्री से दिशा-निर्देश और मदद की दरकार कर रहे हैं। माहरा ने कहा कि बातचीत बहुत ही निंदनीय है और उसमें दूसरा व्यक्ति उच्च न्यायालय के संबंध में बहुत ही अभद्र भाषा में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए सुना जा सकता है।
इतना ही नहीं बातचीत के दौरान वह व्यक्ति पीआईएल करने वाले को भी पकड़ने की और मारने की बात भाजपा विधायक से कर रहा है, जो की बहुत ही निंदनीय है। माहरा ने कहा कि यदि राम सिंह कैड़ा से बात करने वाले दूसरे व्यक्ति वन मंत्री हैं, यह बात सत्यापित हो जाती है तो ऐसे में मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत हस्तक्षेप करके मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मंगवानी चाहिए। इसके अलावा उच्च न्यायालय को स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि इस तरह के प्रकरणों की पुनरावृत्ति ना हो।