अपर सचिव खेल जितेंद्र कुमार सोनकर के मुताबिक विभाग के मैदान और हॉल को खाली समय में स्कूलों एवं खेल एसोसिएशनों को दिया जा सकेगा। इसके लिए विभाग की ओर से जो शुल्क लिया जाएगा उसे खेल विकास निधि में जमा किया जाएगा। जिसके माध्यम से खेल और खेल सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। अपर सचिव के मुताबिक ऐसी एसोसिएशन जो बच्चों से पैसा लेकर टूर्नामेंट कराती हैं उनसे शुल्क लिया जाएगा जबकि बच्चों से पैसा न लेने वाली एसोसिएशनों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इनके लिए प्रवेश होगा निशुल्क
प्रदेश के नगर निगम क्षेत्र से बाहर के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी, अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय पदक विजेता खिलाड़ी, राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागी खिलाड़ी, राज्यस्तर पर दो वर्षों में पदक विजेता खिलाड़ी, आठ से 14 साल एवं 14 से 23 साल के मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के चयनित खिलाड़ी।
अलग-अलग स्तर पर तय किया गया है शुल्क
प्रदेश में खेल अवस्थापना सुविधा के लिए शासन की ओर से स्थानीय, जिलास्तर, राज्यस्तर, राष्ट्रीय स्तर और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए अलग-अलग शुल्क तय किया गया है।