उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में इस सत्र से नेपाली भाषा में पाठ्यक्रम शुरू होगा। विश्वविद्यालय की अध्ययन समिति ने इसकी मंजूरी दे दी है। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय के मानविकी विद्याशाखा की ओर से गठित अध्ययन समिति (बीओएस) की वर्चुअल बैठक विद्याशाखा के निदेशक प्रो. एचपी शुक्ल की अध्यक्षता में हुई। इसमें नेपाली भाषा में पाठ्यक्रम संचालित करने को लेकर हरी झंडी दे दी गई है।
प्रो. शुक्ल ने बताया कि आठ मार्च को हुई बैठक में विशेषज्ञ समिति की ओर से तैयार पाठ्यवस्तु के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गई थी। प्रस्ताव के अनुसार, नेपाली भाषा में छह माह का सर्टिफिकेट और एक वर्ष का डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू किए जाने की बात कही गई थी, जो यूजीसी के मानकों के तहत 28 क्रेडिट का होगा। इसमें प्रवेश लेने के लिए शैक्षिक योग्यता 12वीं पास होगी।
पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. राकेश रयाल ने कहा कि कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी का मानना है कि नेपाल हमारा पड़ोसी देश है। नेपाल से रोटी-बेटी का रिश्ता पहले से ही रहा है, इसलिए नेपाली भाषा हमारे लिए एक क्षेत्रीय भाषा से कम नहीं। डॉ. रयाल ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं पर आधारित पाठ्यक्रमों के प्रस्ताव के तहत कुमाऊं और गढ़वाली भाषा में भी सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू करना है जिनकी विशेषज्ञ समिति और अध्ययन समिति की बैठक जल्द कराई जाएगी। बैठक में गुवाहाटी विश्वविद्यालय से डॉ. खगेन शर्मा, बीएचयू से प्रो. दिबाकर प्रधान, दार्जिलिंग पीजी कॉलेज से डॉ. नवीन पौडयाल और डॉ. राजकुमार मौजूद रहे।
पंतनगर विवि : ऑनलाइन वार्षिक परीक्षाएं शुक्रवार से
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षाएं शुक्रवार से शुरू हो रही हैं। ऑनलाइन हो रही परीक्षाएं सात जुलाई तक चलेंगी। परीक्षाओं में कुल 2981 छात्र शामिल होंगे।
वार्षिक परीक्षा में स्नातक के प्रथम वर्ष को छोड़कर द्वितीय वर्ष से चतुर्थ वर्ष तक, मास्टर्स के भी प्रथम वर्ष को छोड़कर द्वितीय वर्ष और पीएचडी द्वितीय वर्ष के छात्र शामिल होंगे। परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि वार्षिक परीक्षाएं दो पालियों में संपन्न कराई जाएंगी। प्रथम पाली में सुबह 10 से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली में दोपहर तीन से 4:30 बजे तक परीक्षा का समय निर्धारित किया गया है।
सभी छात्र ऑनलाइन ही अपनी उत्तर पुस्तिका को पीडीएफ फॉरमेट में बनाकर अपलोड करेंगे। यदि किसी छात्र की परीक्षा किन्हीं कारणों से छूट जाती है तो उसे पुन: परीक्षा देने के लिए संबंधित महाविद्यालय के अधिष्ठाता से अनुमति लेनी होगी।