पहली बार में लिखित अनुरोध मान्य
डीपीसी के बाद प्रमोशन होने पर कार्मिक को कार्यभार ग्रहण करने के लिए 15 दिन मिलेंगे। अपरिहार्य स्थिति में लिखित अनुरोध पर 15 दिन का समय और दिया जाएगा। यदि कोई कार्मिक कार्यभार ग्रहण न कर प्रमोशन छोड़ने का पहली बार लिखित अनुरोध करेगा तो नियुक्ति प्राधिकारी गुण दोष के आधार पर निर्णय लेंगे।
डीपीसी से पहले अनुरोध तो अनुशासनहीनता
यदि उसी चयन वर्ष में पुन: डीपीसी समिति की बैठक होती है। तो पदोन्नति छोड़ने वाला कार्मिक नोशनल प्रमोशन का दावा नहीं कर सकेगा। कोई कार्मिक डीपीसी की प्रक्रिया शुरू होने से पूर्व ही चयन या पदोन्नति छोड़ने का लिखि
त अनुरोध करेगा तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। इसे तबादले से बचने का प्रयास के तौर पर देखा जाएगा। ऐसे में प्रशासनिक आधार पर उसका तबादला किया जा सकेगा।
...तो खत्म हो जाएगी वरिष्ठता
यदि किसी कार्मिक ने दूसरी बार प्रमोशन छोड़ने को लेकर लिखित अनुरोध किया तो नियुक्ति प्राधिकारी नियमानुसार कार्रवाई करेगा। यदि किसी कार्मिक ने दो से अधिक बार पदोन्नति छोड़ने का लिखित अनुरोध किया तो कार्मिक अपनी वरिष्ठता खो देगा और खोई हुई वरिष्ठता दोबारा प्राप्त नहीं कर सकेगा। नियमावली नियुक्त कार्मिकों की नियमित पदोन्नति में लागू होगी।
नियमावली ढील बरती तो होगी कार्रवाई
इस नियमावली में शिथिलता बरते जाने पर उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2003 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकेगी।
अधिसूचना शिक्षा विभाग के लिए ठीक नहीं
देहरादून। प्रदेश की सरकारी सेवा में प्रमोशन छोड़ने को लेकर जारी अधिसूचना शिक्षा विभाग के लिए ठीक नहीं है। यह कहना है राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ सोहन माजिला का। उन्होंने कहा कि विभाग में पहले ही प्रमोशन के पद बहुत कम हैं। ऐसे में इस अधिसूचना का जारी होना शिक्षकों के साथ अन्याय होगा।