वर्ष 2013-14 में नॉन क्लीनिकल पाठ्यक्रम के लिए पांच लाख की फीस निर्धारित की गई थी। बांडधारी छात्रों के लिए 60 हजार रुपये और बिना बांड वाले छात्रों से पांच लाख की फीस ली जाती थी, लेकिन पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि कम होने के कारण मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह रही थीं।
प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए नए सिरे से फीस का निर्धारित किया है। सरकार का माना है कि फीस कम होने से छात्र नॉन क्लीनिकल पीजी में प्रवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे।