उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन की पहल पर उत्तराखंड राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने राज्य में नशे के बढ़ते चलन के खिलाफ ‘संकल्प नशामुक्त देवभूमि अभियान’ के तहत व्यापक स्तर पर कार्यक्रम चलाए हैं। इसके तहत सभी 13 जिलों में जिलों और तहसील स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां नशे के आदी बच्चों के इलाज, काउंसलिंग, पुनर्वास सहित भांग, डोडा इत्यादि की खेती और दुकानों में प्रतिबंधित नशे की दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगाने सहित कई कार्य करा रही हैं।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन की पहल और दिशा-निर्देश में यह कार्यक्रम चल रहा है। इसकी शुरुआत सितंबर में देहरादून में की गई, जहां मुख्य न्यायाधीश एवं हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीशों सहित प्रदेश के मुख्य सचिव, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे लांच किया था।
इसके तहत सभी 23 जिलों में जिला एवं तहसील स्तर पर स्पेशल टीम गठित की गईं हैं, जिनमें न्यायिक अधिकारियों सहित तहसीलदार, पुलिस इंस्पेक्टर, एसडीएम, पैरा लीगल वॉलेंटियर्स, एनजीओ आदि शामिल हैं। इसके अलावा नैनीताल में नैनीताल और रामनगर में दो जिला स्तरीय टीमें भी हैं। ये टीमें विभिन्न विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ जागरूक करने, उनके अभिभावकों को बच्चों को नशे से बचने की टिप्स देने के कार्य करती हैं।
नैनीताल में कार्यक्रम के संचालक सिविल जज सीनियर डिविजन एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इमरान मोहम्मद खान ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शुरू किए गए कार्यक्रम में नैनीताल में इस संबंध में एक और भी पहल की गई है। यह राज्य का एकमात्र जिला है, जहां चार विभिन्न निजी नशा मुक्ति केंद्रों के सहयोग से नशे के आदी गरीब घरों के लगभग 40 बच्चों का मुफ्त इलाज भी करवाया है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य देश में एकमात्र है, जहां इस अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत अब तक जिले के 220 स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के नेतृत्व में एंटी ड्रग क्लब भी बनाए गए हैं, जिनमें विद्यार्थी और स्वयंसेवक भी शामिल हैं। इसके माध्यम से संदिग्ध लोगों पर भी नजर रखी जाती है। जिला स्तर की समितियां जेल में बंद नशे के कारोबारी रहे कैदियों की प्रत्येक शनिवार को काउंसलिंग भी करती है।