डॉ. नवनीत मोघा ने बताया कि भारत में आरएफवीआर ट्रीटमेंट का खर्च लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये है। वहीं विदेश में मरीजों से ट्रीटमेंट के लिए साढ़े तीन लाख से चार लाख रुपये तक का शुल्क लिया जाता है। लेकिन एम्स में विश्व का पहला संस्थान है जहां यह सुविधा बिल्कुल निशुल्क दी जा रही है।
महिलाओं को कई निज समस्याओं से मिलेगी निजात
डॉ. मोघा ने बताया कि आरएफवीआर ट्रीटमेंट में महिला रोगी की योनि का रास्ता बिना किसी शल्य चिकित्सा के रेडियो फ्रिकवेंसी जैसी आधुनिक पद्धति द्वारा कसा जाता है। वहीं स्ट्रेस यूरिनरी इनकांटीनेंस, ओवर ऐक्टिव ब्लैडर, लाइकन स्क्लेरोसस और मेनोपॉज के पश्चात जेनिटोयूरीरिनरी सिंड्रोम का भी उपचार किया जाता है। इससे महिलाओं को खांसने, छींकने, हंसने पर पेशाब छूटना, योनी के रास्ते से शरीर का बाहर आना और वैवाहिक संबंधों में दिक्कत में होना आदि की समस्या से निजात मिलती है।