इसी प्रकार, मोबाइल मेडिकल यूनिट के तहत दो डॉक्टर, एक स्टाफ नर्स, एक तकनीशियन, एक फार्मासिस्ट, एक एक्स-रे तकनीशियन, एक चालक की तैनाती की जानी है। निदेशालय ने माना कि इतनी सुविधाओं के सापेक्ष फर्मों ने कम दरें बताईं हैं, जिससे इस योजना का काम मानक के अनुसार नहीं हो पाएगा, जबकि तय दरों से कई गुना अधिक पर केवल एक फर्म आई थी।
लिहाजा, पिछले माह निदेशालय ने ये निविदा निरस्त कर दी थी। इसके बाद से ये प्रक्रिया लटकी हुई है। अब निदेशालय नए सिरे से निविदा निकालने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा कि नए साल में भी गरीबों को ये सुविधा मुश्किल ही मिल पाएगी।