देश के विभिन्न राज्यों के लिए 24 कोच वाली ट्रेनें संचालित करने की योजना के तहत उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने बृहस्पतिवार को देहरादून स्टेशन का दौरा किया। महाप्रबंधक ने देहरादून से हर्रावाला, कांसरो, डोईवाला, मोतीचूर तक के रेलवे स्टेशनों का जायजा लिया और ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं तलाशीं। निरीक्षण के बाद अधिकारियों के साथ बैठक कर स्टेशन के विस्तारीकरण के साथ ही अन्य योजनाओं की जानकारी ली।
देहरादून रेलवे स्टेशन के विस्तारीकरण समेत 24 कोच वाली ट्रेनों के संचालन की योजना है। इसके तहत 550 करोड़ रुपये की लागत से दून स्टेशन के कायाकल्प की योजना है। इसी कड़ी में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल बृहस्पतिवार को पहले दून पहुंचे और यहां से अपनी विशेष ट्रेन से हर्रावाला, कांसरो, डोईवाला, मोतीचूर तक के रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफार्म निर्माण, विस्तारीकरण, जमीन की उपलब्धता आदि जरूरतों का जायजा लिया। निरीक्षण में डीआरएम अजय नंदन, सीनियर डीसीएम मोनू लूथरा, सीनियर डीआरएम सुधीर कुमार, उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार समेत तमाम कई अधिकारी शामिल रहे।
एमएफसी के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने स्टेशन परिसर में निर्माणाधीन मल्टी फंक्शनल कॉन्प्लेक्स (एनएफसी) के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने निर्माण कार्यों में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए मौके पर उपस्थित अधिकारियों को कार्यों को तेजी से पूरा कराने की हिदायत दी।
ट्रेनों के संचालन प्वाइंट पर असमंजस
24 कोच वाली ट्रेनों का संचालन देहरादून या हर्रावाला से होगा, इस पर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है। महाप्रबंधक ने जमीन की उपलब्धता समेत तमाम पहलुओं पर विचार विमर्श के बाद ही निर्णय लेने की बात कही है। संबंध में राज्य के मुख्य सचिव समेत तमाम आला अधिकारियों से भी वार्ता की जा रही है।
काश हर रोज आते महाप्रबंधक, डीआरएम
महाप्रबंधक के दौरे के मद्देनजर रेलवे अधिकारियों की अगुवाई में स्टेशन को लकदक कर दिया गया था। व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के साथ स्टेशन परिसर के बाहर बेतरतीब खड़ी होने वाली कारों और दोपहिया वाहनों को सलीके के लगाया गया था। ऑटो-विक्रम, टैक्सी चालकों को परिसर से हटवा दिया गया था। अधिकारी, कर्मचारी वर्दी में मुस्तैद नजर आए। स्टेशन पर व्यवस्थित नजारा देखकर यात्रियों ने कहा कि काश, महाप्रबंधक, डीआरएम समेत तमाम अधिकारी समय-समय पर स्टेशन आते रहें।
देहरादून से नई दिल्ली के लिए राजधानी और तेजस एक्सप्रेस के संचालन की संभावनाएं बहुत कम हैं। महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने पत्रकारवार्ता के दौरान राजधानी एक्सप्रेस और तेजस एक्सप्रेस के संचालन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।
महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने कहा कि इतनी कम दूरी के लिए राजधानी और तेजस ट्रेनों का संचालन संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने भविष्य में देहरादून से देश के विभिन्न राज्यों को जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ती है और अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की बात दोहरायी। वहीं कोरोना संकट के कारण निरस्त चल रहीं पैसेंजर ट्रेनों के संचालन पर भी कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दिया।
महाप्रबंधक ने कहा कि पैसेंजर ट्रेनों का संचालन करके यात्रियों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। इस संबंध में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जो निर्णय लिए जाते हैं उनका भी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाता है। हालांकि ज्यादातर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया है। कुछ चुनिंदा ट्रेनें बची हुई हैं जिनका संचालन जरूरत के हिसाब से किया जाएगा।
टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेनों के दरवाजे रखने होंगे बंद
देहरादून से हरिद्वार के बीच गुजरने वाली सभी ट्रेनों के सभी कोच के दरवाजे बंद रखने होंगे। राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने यह निर्णय वन्यजीवों के हमले से बचने के लिए किया है। इस बाबत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने रेलवे अधिकारियों को अनुरोध पत्र भेजा है।
राजाजी टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह के अनुसार देहरादून और हरिद्वार के बीच पड़ने वाले कांसरो, डोईवाला, हर्रावाला, मोतीचूर आदि स्टेशनों पर सिग्नल नहीं होने की वजह से ट्रेनें बीच जंगल में ही खड़ी हो जाती हैं। कई बार जंगली जानवरों को देखने के चक्कर में मुसाफिर ट्रेन के दरवाजों पर खड़े हो जाते हैं।
ऐसे में ट्रेनों के दरवाजे खुले होने की स्थिति में बाघ के अलावा हाथियों के हमले की आशंका बनी रहती है। इसी समस्या को देखते हुए ट्रेनों के राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच से गुजरने के दौरान सभी कोचों के दरवाजों को बंद रखना सुनिश्चित कराना है। इस संबंध में रेलवे अधिकारियों से लिखापढ़ी की गई है।