सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि पिछले दिनों उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में 56 नियुक्तियों का मामला सामने आया तो इसमें राज्यपाल के रुख से सत्ताधारी भाजपा असहज हो गई। मीडिया में मामला उठने के बाद राज्यपाल ने सीधे इसकी जांच बैठा दी। उनके इस कदम से भाजपा में अंदरखाने काफी विरोध देखने को मिला।
आगरा के प्रोफेसर बन गए थे कुमाऊं विवि में कुलपति
कुमाऊं विवि में राज्यपाल ने कुलाधिपति की शक्तियों का प्रयोग करते हुए आगरा के एक प्रोफेसर को कुलपति पद पर तैनात कर दिया। सूत्रों की मानें तो उनके इस फैसले पर न केवल कुमाऊं विवि बल्कि पार्टी में भी काफी विरोध हुआ। हालांकि बाद में वहां स्थायी कुलपति की तैनाती कर दी गई।
उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों का प्रिंटिंग (पेपर व अन्य) का काम यहीं होता था। लेकिन राज्यपाल के आने के बाद कई विश्वविद्यालयों की प्रिंटिंग का पूरा काम आगरा की कंपनी के पास चला गया था। अचानक हुए इस परिवर्तन को भी राजभवन से जोड़कर देखा गया।