11 साल की मासूम सलोनी दो भाइयों की इकलौती बहन थी। दोनों भाई और अन्य सभी सलोनी को बहुत प्यार करते थे। तीनों को रक्षाबंधन के त्योहार का बेसब्री से इंतजार था। लेकिन, भाइयों की कलाई पर प्यार की डोर बांधने से पहले ही सलोनी यह दुनिया छोड़कर चली गई।
सलोनी को पेंटिग का बेहद शौक था। सलोनी की मौत का सदमा दादा और दादी भी नहीं झेल पाए। सलोनी की मौत के कुछ घंटों बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। तीनों की मौत से सलोनी के पिता सुरेश सेमवाल, मां ममता सेमवाल बड़े भाई रजत (20) और छोटा भाई अमन (13) का रो-रोकर बुरा हाल है। रजत इन दिनों देहरादून कॉलेज में प्रवेश लेने गया था।
जबकि अमन चाचा-चाची के साथ पंजाब गया हुआ था। सलोनी पहले ऋषिकेश में पढ़ती थी और इसी वर्ष उसका दाखिला केंद्रीय विद्यालय सौडखांड भदूरा में कक्षा पांच में हुआ था। सलोनी के पिता सुरेश चंद्र सेमवाल पंजाब में नौकरी करते हैं और दादा सुंदर लाल सेमवाल गांव की पेयजल लाइन के लाइनमैन का काम करते थे।
बारिश के मौसम में जंगलों में उगने वाली मशरूम की कई प्रजातियां जहरीली होती हैं। इन्हें खाने से फूड पाइजनिंग होती है। जंगली मशरूम में अमीनो टोक्सिन मौजूद होते हैं। यह यकृत और किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।
-डा.अमित राय, फिजिशियन/ सीएमएस जिला अस्पताल बौराड़ी