रुड़की क्षेत्र के जिन तीन लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है, उनके सैंपल अब पुणे भेजने की तैयारी है। वहां सैंपल की जांच कराकर स्वास्थ्य विभाग डेंगू वायरस के टाइप का पता करने में जुटा है। कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रुड़की और कलियर की कई प्राइवेट लैब में रैपिड टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव आए 25 लोगों के सैंपल एकत्र किए थे। इन सैंपलों को सिविल अस्पताल में भेजकर एलाइजा जांच कराई थी। इसमें तीन लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इसमें से दो लोग रुड़की ब्लॉक के मोहम्मदपुर पांडा निवासी हैं जबकि तीसरा मरीज मंदाकिनी कॉलोनी निवासी है।
डेंगू की पुष्टि होते ही विभाग ने इनके घरों और आसपास के लोगों के सैंपल लेने शुरू कर दिए थे। साथ ही आसपास फॉगिंग कराई थी। वहीं, अब विभाग तीनों मरीजों के सैंपल दोबारा से जांच के लिए पुणे भेजने की तैयारी कर रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया कि इस जांच में मरीजों में डेंगू का कौन सा वायरस था, इसका पता चलेगा। उन्होंने बताया कि डेंगू वायरस तीन तरह का होता है। इसमें दूसरे और तीसरे नंबर का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।
ये हैं डेंगू के प्रकार
क्लासिकल यानी साधारण डेंगू बुखार : ये बुखार मरीज को करीब पांच से सात दिन तक रहता है। इसमें ठंड लगने के साथ तेज बुखार होता है। मरीज के गले में हल्का दर्द होता है। चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के धब्बे हो जाते हैं। आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द होता है। मरीज को भूख लगनी बंद हो जाती है और बहुत कमजोरी आ जाती है। सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द होता है।
हमरेजिक यानी डीएचएफ डेंगू बुखार : यदि क्लासिकल बुखार के लक्षणों के साथ कुछ और लक्षण दिखाई देते हैं तो समझ लेना चाहिए कि मरीज हमरेजिक बुखार का शिकार हो गया है। इसमें मरीज के नाक और मसूड़ों से खून आने लगता है। शौच या उल्टी करने पर भी खून आता है। खासकर चेहरे पर नीले और काले रंग के निशान पड़ जाते हैं।
शॉक सिंड्रोम यानी डीएसएस डेंगू बुखार : यदि ऊपर के दोनों तरह के बुखार के साथ ही मरीज में अन्य लक्षण भी दिखाई देने लगें तो शॉक सिंड्रोम डेंगू बुखार हो सकता है। इसमें तेज बुखार होने के बावजूद मरीज की त्वचा ठंडी रहती है। मरीज का ब्लड प्रेशर कम हो जाता है और नाड़ी कभी कम और कभी तेज चलने लगती है। मरीज में बेहोशी के लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं।