पुलिस की शुरुआती पूछताछ में भास्कर ने बताया कि उक्त पेन ड्राइव उसे खीम सिंह बोरा ने दी थी। बोरा के गिरफ्तार होने के बाद पेन ड्राइव उसी के पास रही। बोरा ने भी गिरफ्तारी के बाद खुलासा किया था कि उसकी अगली योजना पंचेश्वर बांध का बड़े स्तर पर विरोध करने की थी। पुलिस अंदेशा जता रही है कि इससे जुड़े कुछ साक्ष्य भी ड्राइव में हो सकते हैं। घटना के समय की कुछ पेपर कटिंग, साहित्य आदि की जानकारी भी पेन ड्राइव में उपलब्ध होनी बताई जा रही है।
छापामारी युद्ध, शस्त्र प्रशिक्षण का भी मिला ब्योरा
बरामद पेन ड्राइव माओवादी संगठन के लिए कितनी अहम है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ड्राइव में छापामारी युद्ध और शस्त्र प्रशिक्षण का भी ब्योरा है। पूर्व में खीम सिंह बोरा और अन्य माओवादियों ने हंसपुर खत्ता और नैनीताल के जंगलों में 15 दिन रहकर एमसीसीआई-पीएलजीए ट्रेनिंग कैंप चलाया था। इसमें मध्य प्रदेश से देशी हथियार बनाने के लिए दो विशेषज्ञ बुलाए गए थे। जिन्होंने ट्रेनिंग कैंप में ही छह हथियार बनाए। इसके बाद पश्चिमी चंपारण बिहार से ट्रेनिंग देने के लिए दो विशेषज्ञों को बुलाया गया था।
भास्कर पांडे के पास से एक पेन ड्राइव बरामद हुई थी। जिसका अवलोकन करने के आदेश कोर्ट से मिले हैं। प्रारंभिक अवलोकन में पूर्व में सोमेश्वर, धारी और द्वाराहाट में अंजाम दी गई माओवादी गतिविधियों का डाटा मिला है। जिससे पुष्टि होती है कि उक्त घटनाओं को माओवादियों ने ही अंजाम दिया था। शस्त्र प्रशिक्षण और छापामारी युद्ध का डाटा भी ड्राइव में संकलित किया गया है।
- तपेश चंद, जांच अधिकारी/सीओ अल्मोड़ा