शिक्षा विभाग में शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार के लिए शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी है। इस पुरस्कार के लिए विभाग पर अक्सर सिफारिशी शिक्षकों के चयन के आरोप लगते रहे हैं। यही वजह है कि विभाग इसमें पारदर्शिता के लिए अब चयन प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने जा रहा है। इस मसले पर आज शिक्षा निदेशालय में विभाग के अधिकारियों की बैठक रखी गई हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से इस साल वर्ष 2018 के शैलेश मटियानी पुरस्कार की घोषणा की गई। जिसमें प्रारंभिक के आठ और माध्यमिक के 11 शिक्षक शामिल हैं। नियमानुसार शिक्षा के क्षेत्र में उत्तकृष्ट कार्य के लिए हर जिले से दो शिक्षकों का इसमें चयन होना चाहिए। जिसमें बेसिक का एक और एक माध्यमिक का शिक्षक शामिल हो, लेकिन वर्ष 2018 के घोषित पुरस्कारों में हरिद्वार जिले का एक भी शिक्षक शामिल नहीं है।
इसके अलावा कुछ शिक्षकों की ओर से विभाग पर चयन के दौरान जिला स्तर पर इसके लिए गठित कमेटी की ओर से कम अंक दिए जाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर के मुताबिक इस मसले को लेकर कुछ शिक्षक हाईकोर्ट चले गए हैं। जिनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता न बरतते हुए उनके साथ भेदभाव किया गया है। शिक्षा निदेशक के मुताबिक चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए शासन की ओर से शिक्षा निदेशालय से सुझाव मांगे गए हैं। बैठक कर शासन को आवश्यक सुझाव के साथ प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा।
यह है प्रक्रिया
शिक्षा निदेशक के मुताबिक चयन प्रक्रिया के दौरान शिक्षक को परीक्षा परिणाम, नवीन कार्य आदि के आधार पर अंक दिए जाते हैं। इन अंकों के आधार पर जिला स्तरीय कमेटी उनके नामों की सूची मंडल और मंडल से निदेशालय भेजती हैं।
यह हो सकता है बदलाव
इसके लिए जिला स्तर की कमेटी को केवल प्रमाण पत्र जांचने का अधिकार दिया जा सकता है। जबकि अंक देकर शिक्षका का चयन निदेशालय स्तर से किया जा सकता है। शिक्षा निदेशक के मुताबिक इसके लिए प्रश्नों को ऑबजेक्टिव किया जा सकता है।
पुरस्कृत शिक्षकों को दो साल की सेवा का मिलता है विस्तार
शैलेश मटियानी पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और दस हजार रुपये देकर पुरस्कृत किया जाता है। इसके अलावा इन शिक्षकों को दो साल की सेवा का विस्तार मिलता है।