वाडिया इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके राय के अनुसार अवसाद से ना सिर्फ गंगा के बांग्लादेश के समुद्र तटीय इलाकों का बचाव हो रहा है, वरन गंगा के मैदानी इलाकों में जमीनों की उर्वरा शक्ति भी बढ़ रही है। जमीनों की उर्वरा शक्ति बढ़ने से इसका सीधा असर गंगा के मैदानी इलाकों में खेतीबाड़ी पर भी दिखाई दे रहा है।
भारत और बांग्लादेश में 10 लाख वर्ग किलोमीटर में उपजाऊ मैदान का निर्माण करती है गंगा
गंगा भारत और बांग्लादेश में लगभग 10 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक उपजाऊ मैदान का निर्माण करती है। इन पर दोनों देशों की करोड़ों की आबादी आश्रित है। उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद से निकली गंगा 2525 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसमें से 2071 किलोमीटर भारत में और बाकी का 454 किलोमीटर की दूरी बांग्लादेश में तय करती है।
यमुना, गंडक, कोसी, महाकाली जैसी कई नदियों के भी अवसाद पहुंच रहे
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके राय के अनुसार गंगा में दर्जनभर से अधिक सहायक नदियों के अवसाद मिलते हैं। इनमें महाकाली, करनाली, महानंदा, कोसी, गंडक, सरयू, यमुना आदि नदियों के अवसाद शामिल हैं। इन नदियों के अवसादों के गंगा में मिल जाने से गंगा नदी में अवसादों की मात्रा में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होती है।