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वैज्ञानिकों ने किया खुलासा: नदियों के अवसाद से हो रहा बांग्लादेश के समुद्र तटीय इलाकों का बचाव 

Fri, 17 Sep 2021 05:07 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह , अमर उजाला, देहरादून

सार

शोध के अनुसार यदि गंगा व उसकी सहायक नदियों द्वारा निकले अवसाद (सेडिमेंट) बांग्लादेश के समुद्रतटीय इलाकों तक ना पहुंचें तो वहां कटान से गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। 
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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गंगा व उसकी सहायक नदियों से निकलने वाले अवसादों से बांग्लादेश के समुद्रतटीय इलाकों की सुरक्षा हो रही है। यह बात वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में सामने आयी है।

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कटान से गंभीर संकट खड़ा हो सकता है
शोध के अनुसार यदि गंगा व उसकी सहायक नदियों द्वारा निकले अवसाद (सेडिमेंट) बांग्लादेश के समुद्रतटीय इलाकों तक न पहुंचें तो वहां कटान से गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ जलविज्ञानी डॉ. एसके राय के मुताबिक गंगा व उसकी सहायक नदियों से होने वाले कटान से पूरे साल निकलने वाला अवसाद बांग्लादेश के समुद्रतटीय इलाकों से होते हुए बंगाल की खाड़ी पहुंच रहा है। नदियों का काफी अवसाद बांग्लादेश के समुद्रतटीय इलाकों में जमा होता है। जबकि कुछ हिस्सा बंगाल की खाड़ी पहुंच रहा है।

यदि यह अवसाद उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश के समुद्रतटीय इलाकों में न पहुंचे तो बांग्लादेश के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। यही कारण है जब केंद्र ने गंगा समेत देश की कई नदियों को आपस में जोड़ने की योजना बनाई थी तो बांग्लादेश ने इसका पुरजोर विरोध किया था। बांग्लादेश के विशेषज्ञों ने समुद्रतटीय इलाकों में गंभीर संकट की आशंका जताई थी। शोध के अनुसार गंगा व उसकी सहायक नदियों से निकलने वाला एक हजार मिलियन टन अवसाद बांग्लादेश होते हुए बंगाल की खाड़ी पहुंचता है।

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गंगा के मैदानी इलाकों की उर्वरा शक्ति बढ़ी

वाडिया इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके राय के अनुसार अवसाद से ना सिर्फ गंगा के बांग्लादेश के समुद्र तटीय इलाकों का बचाव हो रहा है, वरन गंगा के मैदानी इलाकों में जमीनों की उर्वरा शक्ति भी बढ़ रही है। जमीनों की उर्वरा शक्ति बढ़ने से इसका सीधा असर गंगा के मैदानी इलाकों में खेतीबाड़ी पर भी दिखाई दे रहा है। 

भारत और बांग्लादेश में 10 लाख वर्ग किलोमीटर में उपजाऊ मैदान का निर्माण करती है गंगा 
गंगा भारत और बांग्लादेश में लगभग 10 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक उपजाऊ मैदान का निर्माण करती है। इन पर दोनों देशों की करोड़ों की आबादी आश्रित है। उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद से निकली गंगा 2525 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसमें से 2071 किलोमीटर भारत में और बाकी का 454 किलोमीटर की दूरी बांग्लादेश में तय करती है।

यमुना, गंडक, कोसी, महाकाली जैसी कई नदियों के भी अवसाद पहुंच रहे 
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके राय के अनुसार गंगा में दर्जनभर से अधिक सहायक नदियों के अवसाद मिलते हैं। इनमें महाकाली, करनाली, महानंदा, कोसी, गंडक, सरयू, यमुना आदि नदियों के अवसाद शामिल हैं। इन नदियों के अवसादों के गंगा में मिल जाने से गंगा नदी में अवसादों की मात्रा में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होती है। 
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