इंप्लांट फेल होने पर दोबारा डालना पड़ता
किसी भी मरीज में घुटना या कूल्हा रिप्लेसमेंट के दौरान इंप्लांट डालने पड़ते हैं। अगर शरीर में बैक्टीरिया मौजूद हैं तो इंफेक्शन हो जाता है। ऐसे में घुटना और कूल्हा का इंप्लांट फेल हो जाता है। ऐसे में दोबारा सर्जरी कर इंप्लांट डालना पड़ता है। ऐसे में मरीज का दोगुना खर्च होता है, क्योंकि इंप्लांट का खर्च अधिक आता है।
नाक और बगल से लिए सैंपल
डॉ. दीपक ने बताया कि बंडल्ड इंटरवेंशन में नाक और बगल से सैंपल लेकर बैक्टीरिया की जांच की जाती है। बैक्टीरिया मिलने पर इनका इलाज किया जाता है। इसके बाद ही सर्जरी प्लान की जाती है। दून अस्पताल में जल्द ही यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस शोध में दिल्ली एम्स ने डॉ. बेनु धवन, डॉ. ज्योति रावरे, डॉ. मैत्रेई, डॉ. टीएन वेलपांड्यन, डॉ. श्रीनिवास, डॉ. भावुक गर्ग, डॉ. राजेश मल्होत्रा सहयोग किया।