पौराणिक मान्यताओं के अनुसार केदारनाथ व बदरीनाथ की पूजा-अर्चना के लिए पहले एक ही पुजारी थे। वे शाम को बदरीनाथ व सुबह केदारनाथ पूजा के लिए हिमालय की पगडंडियों से होकर पहुंचते थे। दोनों धामों के कपाट खोलने के लिए भी पुजारी व अन्य लोग इसी रास्ते से आवाजाही करते थे लेकिन सदियों से यह प्राचीन ट्रेक अस्तित्व में नहीं है।
हिटो केदार मुहिम भी हुई हवाई
केदारनाथ धाम तक श्रद्धालुओं की पहुंच को आसान व सुरक्षित बनाने और वैकल्पिक मार्गों को पुनर्जीवित करने के लिए अक्तूबर 2016 में कांग्रेस सरकार द्वारा हिटो केदार अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत 9 वैकल्पिक मार्गों से ट्रेकिंग दलों को केदारनाथ भेजा गया था लेकिन इसके बाद इन प्राचीन ट्रेकों की कोई सुध नहीं ली गई।
केदारनाथ-बदरीनाथ को जोड़ने वाले प्राचीन ट्रेक की खोज के लिए निम के स्तर से सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं लेकिन शासन स्तर पर कोई सहयोग नहीं किया गया। पुजारी ट्रेक की खोज हो जाती तो यह, दोनों धामों की यात्रा को नया आयाम देने के साथ एडवेंचर को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण साबित होता।
-कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल, निम के पूर्व प्राचार्य