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उत्तराखंड: आईपीएस अफसरों को केंद्र में भेजने की हो गई थी तैयारी, अचानक शासन ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर लगा दी रोक

Wed, 15 Dec 2021 10:43 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

सचिव गृह ने गत आठ नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय को उत्तराखंड कैडर के आठ आईपीएस अधिकारियों के नाम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजे थे।
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भारतीय पुलिस सेवा - फोटो : Shutterstock/File
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विस्तार
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उत्तराखंड संवर्ग के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के आठ अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने की तैयारी पर फिलहाल विराम लग गया है। माना जा रहा है कि पुलिस अधिकारियों की नाखुशी और एतराज के चलते शासन को प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया रोकनी पड़ी। अपर मुख्य सचिव गृह आनंद बर्द्धन के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक के अनुरोध पर प्रक्रिया रोकी गई। 

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सचिव गृह ने गत आठ नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय को उत्तराखंड कैडर के आठ आईपीएस अधिकारियों के नाम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजे थे। इन अधिकारियों में 2005 बैच की आईपीएस अफसर नीरू गर्ग, मुख्तार मोहसिन, 2006 बैच के अरुण मोहन जोशी, राजीव स्वरूप, 2007 बैच के सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस, 2008 बैच की पी. रेणुका देवी और बरिंदरजीत सिंह के नाम शामिल थे।

करीब एक महीने के अंतराल में शासन ने गृह मंत्रालय से प्रतिनियुक्ति के लिए भेजे गए नाम वापस मांग लिए। मजेदार बात यह है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छह अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति को लेकर ऑफर पत्र जारी हो चुके थे। नौ दिसंबर को सचिव गृह रंजीत कुमार सिन्हा ने गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव को पत्र लिखकर इस आग्रह के साथ नामांकन वापस लिए कि शीघ्र नए नामांकन भेजे जाएंगे।
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कैडर मैनेजमेंट का दिया तर्क
शासन ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए अफसरों के नाम वापस लेने के पीछे कैडर मैनेजमेंट का तर्क दिया। पत्र में इसका प्रमुखता उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि उत्तराखंड संवर्ग में विभिन्न स्तरों के कैडर मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति भेजे गए नामों पर पुनर्विचार किया जाए।

अफसरों की नाराजगी तो नहीं यूटर्न की वजह
आईपीएस अफसरों को प्रतिनियुक्ति पर शासन के यूटर्न को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसके पीछे एक वजह पुलिस अफसरों की नाराजगी भी बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि कुछ अफसरों से उनका नाम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने को लेकर नहीं पूछा गया। हालांकि इस चर्चा की पुष्टि किसी जिम्मेदार अधिकारी ने नहीं की। चर्चा तो यहां तक है कि मामला आईपीएएस अफसरों को एसोसिएशन में भी उठा और अदालत जाने तक की बात हुई। ये सारी बातें संज्ञान में आने के बाद पुलिस मुख्यालय के अनुरोध पर शासन ने प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया को रोक दिया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय से आईपीएस अफसरों के नाम मांगे गए थे। पुलिस महानिदेशक ने जो नाम भेजे, उन्हें मंत्रालय को प्रेषित किया गया। फिर पुलिस महानिदेशक ने कैडर मैनेजमेंट को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिनियुक्ति के लिए नामांकित अधिकारियों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उनके अनुरोध पर शासन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा।
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- आनंद बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव, गृह, उत्तराखंड शासन

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