प्रदेश के दुर्गम और दूरस्थ स्थानों में नौकरी कर रहे शिक्षकों की गृह जिले में तैनाती की मुराद पूरी हो सकती है। सरकार के स्तर पर बेसिक शिक्षकों को उनके गृह जिले में तैनाती के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। मजेदार बात यह है कि विभाग का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं था, लेकिन कैबिनेट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए विभाग को कार्यवाही करते हुए स्पष्ट प्रस्ताव के निर्देश दिए हैं। आज कैबिनेट बैठक में इसका प्रस्ताव आ सकता है।
प्रदेश में बेसिक के शिक्षकों का जिला कैडर है, लेकिन कई शिक्षक अपने गृह जिले से बाहर दूरस्थ क्षेत्रों के जिलों में तैनात हैं। देहरादून जिले का निवासी कोई शिक्षक पिथौरागढ़ या चमोली जिले में तैनात है तो चमोली जिले का शिक्षक उत्तरकाशी जिले में कार्यरत है। यही हाल कुछ अन्य जिलों का है। जो गृह जिले एवं इसके आस पास के जिलों के स्कूलों तैनाती के लिए पूरे साल भर प्रयास करते रहे हैं।
चुनाव से पहले इन शिक्षकों राहत देने के लिए मंत्रिमंडल ने इन शिक्षकों के काउंसलिंग के आधार पर गृह जिलों में तैनाती पर सहमति दी थी। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक मंत्रिमंडल की सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद विभाग की ओर से इसका स्पष्ट प्रस्ताव तैयार कर लिया गया। इस प्रस्ताव को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक में भी लाया जा चुका है। बैठक में सुझाया गया कि इन शिक्षकों का संवर्ग परिवर्तन किया जा सकता है।
दूरस्थ जिलों में तैनाती की यह रही वजह
बेसिक शिक्षा विभाग में पूर्व में स्टेट काउंसिलिंग के चलते वर्ष 2014 में 27 सौ से अधिक एवं वर्ष 2016 में 11 सौ से अधिक पदों पर शिक्षकों की भर्ती हुई। स्नसमें कई शिक्षक गृह जिलों से बाहर तैनाती पा गए। इसके अलावा वर्तमान में चल रही 2200 से अधिक पदों पर चल रही शिक्षक भर्ती में भी उम्मीदवारों ने विभिन्न जिलों से आवेदन किया हुआ है। आरक्षित पदों पर नियुक्तियों के चलते भी कुछ शिक्षक एक से दूसरे जिले मेें तैनाती पा गए हैं।
बेसिक के शिक्षकों की गृह जिलों में तैनाती की मंत्रिमंडल की बैठक में सहमति हो चुकी है। विभाग की ओर से परीक्षण किया जा रहा है।
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आर मीनाक्षी संदुरम शिक्षा सचिव