इंसास राइफल को 1999 में भारतीय आयुध निर्माणियों में तैयार किया गया था। इसके बाद से इसका इस्तेमाल भारतीय थल सेना और नेपाली आर्मी व भारतीय पैरा मिलिट्री फोर्स ने किया था, लेकिन कारगिल युद्ध में भारतीय थल सेना को इंसास का बेहतर रिजल्ट नहीं मिला। इसके बाद से भारतीय सेना से इनके हटाए जाने का क्रम शुरू हुआ और इन्हें पैरा मिलिट्री फोर्स को दिया जाने लगा। नेपाल आर्मी का भी इंसास के साथ बुरा अनुभव है।
उत्तराखंड पुलिस के लिए उपयुक्त है इंसास
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इंसास रायफल उत्तराखंड पुलिस के लिए उपयुक्त हथियार है। इसे ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात पुलिसकर्मियों को दिया जाएगा। यह हथियार एक मिनट में 600 से 650 गोलियां दाग सकता है, जिसकी रेंज 400 से 600 मीटर तक है। डीजीपी अशोक कुमार ने भी एसएलआर और इंसास राइफल को ही उत्तराखंड पुलिस के लिए तरजीह दी थी। इसके अलावा पिस्टलों की खरीद भी अब जल्द किए जाने की बात कही जा रही है।
हमें सीआरपीएफ से इंसास राइफल मिल रही हैं। यह सात से आठ हजार के आसपास हो सकती हैं। इनके अलॉटमेंट की प्रक्रिया में एक से डेढ़ माह या कुछ ज्यादा समय लग सकता है। इसके बाद इन्हें पुलिस में शामिल किया जाएगा, जिससे अंग्रेजों के जमाने की थ्री नॉट थ्री राइफलों को हटाया जाएगा।
- अशोक कुमार, डीजीपी उत्तराखंड