जब हमने पहला ओपन माइक कार्यक्रम किया था, तब हमने देखा कि कितने लोग ऐसे है जिन्होंने इतनी सुंदर कविताएं, गजलें लिखी है,लेकिन उन्हें आज तक मंच नहीं मिला था। इसलिए हमने इस प्लेटफॉर्म को बड़ा करने के बारे में सोचा।हमने युवा कवियों को एक मंच दिया है।
- खुशबू गैरेला
कुछ बड़ा करने की सोच
जब हमने ओपन माइक कार्यक्रम शुुरु किया था, तब अंदाजा भी नहीं था कि हमारे साथ ही इतने सारे युवाओं को इस मंच की जरूरत थी। इस मंच ने मुझे भी आत्मविश्वास दिया है। जब बड़ी संख्या में हमारे कार्यक्रमों में युवा पहुंचते है तो लगता है कि हम कुछ बड़ा कर रहे हैं।
- आयुष बगवाड़ी
‘नशे से जंग अल्फाज के संग’ अभियान का भी बने हिस्सा
दोनों दोस्तों की पहल की चर्चा होने लगी तो जिला प्रशासन व समाज कल्याण विभाग ने भी इसका संज्ञान लिया। दोनों युवा कवियों को नशा मुक्ति अभियान के लिए चुना गया। इसके बाद खुशबू और आयुष ने नशा मुक्ति के लिए ‘नशे से जंग अल्फाज के संग’ कार्यक्रम की सीरीज चलाई।
नशे से जंग अल्फाज के संग 0.2 का अप्रैल में आयोजन किया गया। खुशबू ने बताया कि इस दौरान 60 साल की एक बुजुर्ग महिला ने अपनी कविता पढ़ी, जो उन्होंने 11 साल की उम्र में लिखी थी। उन्होंने कविता के जरिए अपने गांव में नशे की उस स्थिति के बारे में बताया था।