सीबीटीएस के संस्थापक योगेश गर्ब्याल ने बताया कि टीम में शामिल एसडीआरएफ (उत्तराखंड पुलिस) के आरक्षी राजेंद्र नाथ ने भी यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर इतिहास रचा है। राजेंद नाथ ऐसा करने वाले उत्तराखंड पुलिस के पहले जवान हैं।
रूस-जार्जिया सीमा पर स्थित माउंट एलब्रुस को फतह करने वाली टीम में राजस्थान निवासी जुड़वा भाई तपन देव सिंह और तरुण देव सिंह भी थे। वे यूरोप की इस चोटी को फतह करने वाले भारत के पहले जुड़वा भाई बने हैं। टीम के चौथे सदस्य लद्दाख से जिगमित थरचिन हैं, जिन्होंने इसी साल माउंट एवरेस्ट को फतह किया था। वह केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के पहले युवा बने हैं, जिन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी को फतह किया है।
राजस्थान के जुड़वा भाई तपन और तरुण पिछले साल से सीबीटीएस संस्था से जुड़े थे। एवरेस्ट विजेता शीतल उन्हें पर्वतारोहण के गुर सिखा रही थी। दोनों भाइयों का सपना है कि वे एक दिन दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराएं। दोनों उत्तराखंड के कुमाऊं हिमालय में स्थित दारमा और व्यास घाटी में अपना प्रशिक्षण जारी रखेंगे। 2023 में वह माउंट एवरेस्ट अभियान की शुरुआत करेंगे।
योगेश गर्ब्याल ने बताया कि पिथौरागढ़ निवासी शीतल बेहद गरीब परिवार से हैं। पिता पिथौरागढ़ में लोकल टैक्सी चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। इस साल शीतल को ‘द हंस फाउंडेशन’ ने चोटी अन्नपूर्णा के लिए स्पांसर किया था। बताया कि भविष्य में शीतल आठ हजार मीटर से अधिक 14 सबसे ऊंची और दुनिया के सातों महाद्वीपों की ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराना चाहतीं हैं। शीतल एवरेस्ट, कंचनजंगा और अन्नपूर्णा जैसे दुर्गम पर्वतों को फतह कर चुकीं हैं।
केएमवीएन अधिकारियों ने जताई खुशी
कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) में कार्यरत शीतल की उपलब्धि से नैनीताल जिला प्रशासन और निगम के अधिकारी गदगद हैं। डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल, केएमवीएन के एमडी नरेंद्र सिंह भंडारी, महाप्रबंधक एपी वाजपेयी, एडीएम अशोक जोशी, कुमाऊं गढ़वाल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष दिनेश और गुरुरानी ने शीतल की उपलब्धि पर खुशी जताई है। शीतल की इस सफलता पर रं कल्याण संस्था के मुख्य संरक्षक नृप सिंह नपलच्याल और केंद्रीय अध्यक्ष बिशन सिंह बोनाल आदि लोगों ने खुशी जताई है।