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उत्तराखंड: अब सभी कर्मचारियों की मांगों के लिए दोबारा जिंदा होगी समन्वय समिति

Mon, 02 Aug 2021 11:48 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

कर्मचारियों की एक जैसी मांगों को लेकर वर्ष 2019 में इस समन्वय समिति ने आंदोलन किया था, जिसके बाद तत्कालीन वित्त मंत्री स्व. प्रकाश पंत के साथ लिखित समझौता हुआ था।
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सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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अब सभी कर्मचारियों, शिक्षकों, पेंशनरों की मांगों के लिए उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति दोबारा जीवित की जाएगी। विभिन्न विभागों, निगमों की 13 सूत्री मांगों पर यह समिति एकजुट होकर लड़ाई लड़ेगी।

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कर्मचारियों की एक जैसी मांगों को लेकर वर्ष 2019 में इस समन्वय समिति ने आंदोलन किया था, जिसके बाद तत्कालीन वित्त मंत्री स्व. प्रकाश पंत के साथ लिखित समझौता हुआ था। समिति के संयोजक एवं उत्तराखंड सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि इस समझौते के तहत एक भी मांग को पूरा नहीं किया गया है।

पिछले दो वर्ष में इस समिति से जुड़े तमाम पदाधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कई राजनीतिक दलों की सदस्यता ले चुके हैं। दीपक जोशी ने कहा कि सचिवालय सहित प्रदेश के सभी कार्मिकों व शिक्षकों की भावनाओं व आग्रह को देखते हुए कार्मिकों की इस समन्वय समिति को पुनर्जीवित कर इन सभी कॉमन मुद्दों का अपेक्षित क्रियान्वयन जल्द से जल्द कराया जाएगा।
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समिति को जल्द ही नए सिरे से सचिवालय तथा प्रदेश के अन्य सेवा संघों के प्रभावशाली पदाधिकारियो के सहयोग से नवीन संयोजक मंडल गठित कर सहमति प्राप्त बिंदुओं सहित वर्तमान में अन्य नवीन कॉमन मांगों को पूर्ण कराया जाएगा। समन्वय दीपक जोशी ने इस बात पर चिंता जताई कि सेवा संघों की मान्यता नियमावली के अंतर्गत कोई भी सेवानिवृत्त कार्मिक किसी भी सेवा संघ में पदाधिकारी नहीं रह सकता। ऐसी स्थिति में ऐसे सेवा संघों की मान्यता रद्द किए जाने का नियम कार्मिक विभाग से निर्गत है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार व कार्मिक विभाग को ऐसे संघों का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, जिसमें पदाधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद भी काबिज हैं। 

इन मांगों के लिए एक होकर लड़ेंगे
1- गोल्डन कार्ड की खामियों को दूर कर सीजीएचएस योजना से आच्छादित करना।
2- केंद्र द्वारा घोषित 11 प्रतिशत डीए की ऐरियर सहित बहाली कराना।
3- सभी विभागों, शिक्षणेतर संस्थानों, निगमों, निकायों में एक माह के भीतर पदोन्नति के सभी रिक्त पदों को भरा जाना।
4- कार्मिक विभाग की शिथिलीकरण नियमावली 2010 को पुन: लागू कराया जाना।
5- एमएसीपी के स्थान पर राज्य कार्मिकों हेतु एसीपी की पूर्व व्यवस्था 10, 16 व 26 प्रभावी कराया जाना। ऊर्जा निगम हेतु 9, 14, 19 की बहुप्रतीक्षित व्यवस्था को लागू कराया जाना। शिक्षकों को पूरे सेवाकाल मे कम से कम तीन पदोन्नति या तीन एसीपी की अनुमन्यता।
6- एक अक्तूबर 2005 के बाद नियुक्त कार्मिकों को पुरानी पेंशन की देयता हेतु सरकार के स्तर से संकल्प पारित कराकर केंद्र सरकार को भेजा जाना।
7- पति-पत्नी के सरकारी सेवा मे नियुक्त होने पर दोनो को मकान किराया भत्ते की अनुमन्यता कराया जाना।
8- चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों को स्टाफिंग पैटर्न का  लाभ दिलाने हुए ग्रेड वेतन 4200 की अनुमन्यता तथा वाहन चालकों को इस व्यवस्था के अन्तर्गत ग्रेड वेतन 2400 को इग्नोर कराते हुए ग्रेड वेतन 2800, 4200, 4600 व 4800 दिलाया जाना।
9- राजकीय कार्मिकों हेतु निर्गत होने वाले वेतन भत्तों व अन्य सेवा लाभों के शासनादेशों में ही समान रूप से निगम/स्वायत्तशासी निकायों के कार्मिकों के लिए भी एकसाथ आदेश निर्गत कराया जाना।
10- राज्य सचिवालय के समान सभी निदेशालयों में पांच दिवसीय कार्य दिवस लागू कराया जाना।
11- सचिवालय भत्ते की दर मूल वेतन का 10 प्रतिशत कराया जाना।
12- उपनल व आउटसोर्स कार्मिकों को समान कार्य के अनुरूप समान वेतन का लाभ अनुमन्य कराया जाना।
13- राज्य के सभी लोक सेवकों हेतु एक समान नीति अपनाते हुए अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को प्रतिवर्ष मूल वेतन में वृद्धि के सापेक्ष मकान किराया भत्ता की दर में प्राप्त होने वाली वृद्धि के अनुरूप प्रदेश के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों के प्रति वर्ष वेतन वृद्धि उपरांत बढ़े हुए मूल वेतन के सापेक्ष मकान किराया भत्ता की दर में प्रतिवर्ष वृद्धि कराया जाना।

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