इमरान का कहना था कि वे दोनों साल भर पहले से एक दूसरे को जानते थे। इस कारण लिव इन रिलेशन में रहने लगे। इमरान ने कहा कि उससे महिला की किसी अन्य युवक के साथ दोस्ती थी। उसके पास उस युवक के मैसेज आते थे। यह इमरान को पसंद नहीं आया। इसी कारण दोनों में आए दिन झगड़ा होने लगा। स्वतंत्रता दिवस की रात में भी इमरान ने महिला के मोबाइल पर मैसेज देखा तो उसने गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
हालांकि पत्रकार वार्ता के दौरान पुलिस ने ऐसी कोई बात नहीं बताई और इमरान की यह थ्योरी गले उतर भी नहीं रही क्योंकि उसे महिला के मोबाइल का पासवर्ड पता नहीं था। पासवर्ड तो उसने दीक्षा की हत्या के बाद झूठ बोलकर उसकी बेटी से लिया था। यह भी साफ है कि महिला इमरान को ही प्यार करती थी, उसके नाम का टैटू भी गुदा रखा था।
महिला को पता था वह ऋषभ नहीं बल्कि इमरान है
बताया जाता है कि दीक्षा नोएडा की जिस कॉलोनी में रहती थी, वहां ज्यादातर हिंदू समुदाय के लोग रहते थे। दीक्षा के कहने पर ही इमरान कालोनी के लोगों को खुद का नाम ऋषभ तिवारी बताता रहा।
पुलिस की मौजूदगी में पिटा हत्यारोपी
कोतवाली पुलिस के सामने ही कुछ लोगों ने इमरान को पीट दिया। अचानक हुए हमले से पुलिस सन्न रह गई और वह उसे वापस कोतवाली के भीतर ले गई। कुछ देर बाद पुलिस के जवान सुरक्षा घेरा बनाकर इमरान को दोबारा कोतवाली से बाहर लाए और गाड़ी में बैठाकर कोर्ट ले गए। लोग इस बात को लेकर नाराज थे कि दूसरे संप्रदाय के युवक ने नोएडा से नैनीताल आकर अपनी महिला मित्र की हत्या की। उनका कहना था कि पुलिस की लचर कार्यप्रणाली से नैनीताल आपराधिक वारदातों का गढ़ बनता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या किसी आरोपी पर पुलिस फोर्स की मौजूदगी में कोई भी व्यक्ति इस तरह से हमला कर सकता है। इस संबंध में कोतवाल अशोक कुमार सिंह का कहना है कि मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
होटल संचालकों के खिलाफ होगी कार्रवाई
एएसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि रामनगर और नैनीताल के दोनों होटलों में दो लोगों की आईडी देकर चार लोगों के लिए कमरे बुक कराए गए थे जबकि नियमानुसार चारों लोगों की आईडी जमा होनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि दोनों होटल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई होगी।