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कोरोना से जंग: उत्तराखंड में कोविड जांच के लिए किट की कमी नहीं, फिर क्यों सैंपलिंग हो रही कम?

Thu, 13 Jan 2022 12:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड में कोविड सैंपलिंग बढ़ाने से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि प्रदेश में कोविड जांच के लिए टेस्टिंग किट की कमी नहीं है।
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कोरोना जांच - फोटो : पीटीआई फाइल फोटो
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर अपने चरम की ओर बढ़ रही है। संक्रमण की रफ्तार पहली दो लहरों से तेज है। रोकथाम के लिए जांच के इंतजाम के सरकारी दावे भी भरपूर हैं। किसी भी जिले में आरटीपीसीआर, ट्रूनेट, एंटीजन टेस्ट के लिए किट की कमी नहीं है। हर जिले में आने-जाने वाले लोगों की अनुमानित संख्या के अनुपात में किट उपलब्ध कराई गई है। साथ ही जरूरत पर अविलंब डिमांड भेजने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत अब सैंपलिंग की रफ्तार बढ़ाने पर है ताकि समय से संक्रमण चिह्नित कर रोकथाम के उपाय किए जा सकें। 

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प्रदेश में रोज 20 हजार लोगों की होगी कोरोना जांच
उत्तराखंड में कोविड सैंपलिंग बढ़ाने से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि प्रदेश में कोविड जांच के लिए टेस्टिंग किट की कमी नहीं है। इसके बावजूद प्रतिदिन औसतन 15 हजार सैंपलों की जांच की जा रही है। सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन 20 हजार सैंपलिंग करने के निर्देश दिए हैं।

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कोरोना की पहली और दूसरी के बाद प्रदेश में कोविड जांच के लिए प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ी है। पहले राज्य में कोविड जांच के लिए एक भी पैथोलॉजी लैब नहीं थी। वर्तमान में 11 सरकारी और 26 प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में कोविड सैंपलों की जांच की रही है। प्रदेश में जिस रफ्तार के साथ संक्रमित मामले बढ़ रहे हैं। उसकी तुलना में कोविड सैंपलिंग नहीं हो रही है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद संक्रमण थमने के बाद टेस्टिंग भी कम हो गई थी। लेकिन कोरोना का नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की दस्तक के बाद सरकार ने जिलों को सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए थे।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा का कहना है कि कोविड सैंपलिंग बढ़ाने के लिए सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं। पहले की तुलना में कोविड जांच बढ़ी है। प्रदेश में कोविड टेस्टिंग की कोई कमी नहीं है। कोविड लक्षण और संक्रमित के संपर्क में आए लोगों को अनिवार्य रूप से आरटीपीसीआर जांच की जा रही है। इसके अलावा रैडम जांच भी कराई जा रही है।

प्रदेश में एक सप्ताह में कोविड जांच और संक्रमित मामले
 दिन          -   सैंपल जांच -  संक्रमित मामले
1 जनवरी    -    15090  -   118
2 जनवरी    -    13529  -    259
3 जनवरी    -     15528  -  189
4 जनवरी    -     15915  -    310
5 जनवरी    -     18447  -    505
6 जनवरी    -     16844      630

रोज 10 हजार जांच की है क्षमता

देहरादून जिले में कोरोना जांच की टेस्टिंग किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। जैसे-जैसे जरूरत पड़ रही है उससे पहले ही आरटीपीसीआर और एंटीजन जांच के लिए बड़ी मात्रा में किट मंगा ली जा रही है। प्रतिदिन 10 हजार से अधिक जांच भी कराई जाए तो भी किट उपलब्ध हऐ। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. राजीव दीक्षित ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों और मुख्य चिकित्साधिकारी अधिकारी कार्यालय की सर्विलांस और टेस्टिंग टीम के पास भी पर्याप्त किट हैं। बार्डर चेकपोस्ट,  रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर कोरोना की जांच के लिए निजी लैब के कर्मियों को भी जिम्मा दिया गया है।

मात्र 1500 किट, अधिक की दरकार
हरिद्वार जनपद में केवल फिलहाल 1500 आरटीसीआर की किट की उपलब्धता है। हालांकि अधिकारी आवश्कतानुसार आरटीपीसीआर किट मिलते रहने का दावा कर रहे हैं। दूसरी लहर के दौरान विभाग के पास एक लाख 33 हजार 365 आरटीपीसीआर किट थी। विभाग के पास इस वक्त 53 हजार 250 एंटीजन किट मौजूद है। इस समय से चार हजार से छह हजार तक सैंपल लिए जा रहे हैं। दूसरी लहर में एक दिन में 12 हजार से 15 हजार तक सैंपल भी लिए गए थे। 

चमोली: रोज हो रही पांच सौ लोगों की जांच
जनपद के अस्पतालों में 44 हजार रेपिड एंटीजन टेस्ट किट और 34 हजार आरटीपीसीआर टेस्ट किट्स उपलब्ध हैं। 1600 ट्रूनट किट भी मौजूद हैं। दूसरी लहर के मुकाबले अभी जांच की रफ्तार धीमी है। प्रतिदिन कोरोना की चार से पांच सौ जांचें हो रही हैं, अब  प्रतिदिन आठ सौ लोगों की जांच की जाएगी। 

टिहरी: जांच में किट की कमी नहीं आएगी आड़े
नई टिहरी में 36 हजार 638 टेस्टिंग किट्स उपलब्ध हैं। एसीएमओ डा. एलडी सेमवाल ने बताया कि विभाग के पास वर्तमान में संक्रमण जांच के लिए रैपिड एनटीजन, आरटीपीसीआर, ट्रूनेट की 36 हजार 638 टेस्टिंग किट्स उपलब्ध हैं। पिछले एक सप्ताह में 372 लोगों के सैंपल लेकर जांच की गई है। 

उत्तरकाशी: एक माह के लिए पर्याप्त हैं इंतजाम
जनपद में एक माह के लिए कोरोना टेस्टिंग किटस पर्याप्त मात्रा में हैं। आवश्यकता पड़ने पर और मंगा ली जाएंगी। एसीएमओ डा. विपुल विश्वास ने बताया कि जनपद में 12 हजार ट्रूनेट किट, 22035 वीटी वॉयल किट व 32513 रैपिड एंटीजन टेस्ट किट उपलब्ध हैं, जो एक माह के लिए पर्याप्त हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई कोरोना जांच

पौड़ी जिले में 17 हजार 600 कोरोना किट हैं। जिले के समस्त प्रवेश द्वारों पर जांच की जा रही है। कौडिया, लक्ष्मणझूला, चिल्लरखाल, रेलवे स्टेशन कोटद्वार में सैंपलिंग बढ़ा दी गई है। सीएमओ डा. प्रवीण कुमार के अनुसार किट के लिए डिमांड भी भेजी गई है।  इसके साथ ही सभी चिकित्सालयों में फ्लू क्लिनिक बनाए गए हैं। रुद्रप्रयाग जिले में प्रतिदिन 350 से 500 टेस्ट किए जा रहे हैं।

सीएमओ डा. बीके शुक्ला ने बताया कि 15 हजार एटीजन टेस्टिंग किट व 18 हजार आरटीपीसीआर टेस्टिंग किट हैं। आने वाले दिनों में जरूरत के हिसाब से किट मंगाई जाएंगी। सीएचसी व अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। चंपावत जिले में 16503 एंटीजन टेस्टिंग किट उपल्बध थे। किटों को जरूरत के हिसाब से स्थानीय स्तर पर भी खरीदा जा रहा है। आरटीपीसीआर परीक्षण के लिए 20 हजार वॉयल मिली है। रोज 700 लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। 

अल्मोड़ा: 22 हजार जांच किट हैं मौजूद
पहली और दूसरी लहर की अपेक्षा वर्तमान में संसाधनों की कमी नहीं है। जिले में फिलहाल 22000 कोरोना टेस्टिंग किट मौजूद हैं। केंद्र प्रभारियों से हर दूसरे दिन किट की उपलब्धता पर इनपुट लिया जाता है। पिथौरागढ़ जिले में 8900 एंटीजन टेस्ट किट हैं। बेस अस्पताल में एक हजार ट्रूनेट किट उपलब्ध हैं। प्रतिदिन बाहर से आने वाले डेढ़ सौ से अधिक लोगों की जांच की जा रही है। मांग के अनुरूप किट उपलब्ध कराई जा रही है। बागेश्वर जिले में पांच हजार से अधिक कोरोना टेस्टिंग किट उपलब्ध हैं। रोज चार सौ लोगों की जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। शुक्रवार को 320 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। जरूरत पड़ी तो सैंपलिंग तेज की जाएगी।

ऊधमसिंह नगर: एक महीने के लिए भरपूर है इंतजाम
कोरोना जांच के लिए करीब 30 हजार टेस्टिंग किट उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार किटें उपलब्ध कराईं जा रहीं हैं। सीमाओं पर जांच की जा रही है। कोशिश रोज जांच की संख्या बढ़ाने की है। नैनीताल जिले में 21 हजार आरटीपीसीआर किट व 19 हजार एंटीजन किट है। हर सीएचसी व पीएचसी में डेढ़ से दो हजार और जिला अस्पताल में पांच हजार किट दी गई है। तीन महीने तक रोज जांच की जा सकती है।
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